नई दिल्ली:कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गलवान घाटी संघर्ष के 6 साल पूरे होने पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। खड़गे ने आरोप लगाया कि 2020 में भारत के 20 जवानों की शहादत के बावजूद, मोदी सरकार ने देश के रणनीतिक और आर्थिक हितों को चीन के सामने पूरी तरह “सरेंडर” (आत्मसमर्पण) कर दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए एक पोस्ट में खड़गे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गलवान झड़प के बाद चीन को “क्लीन चिट” दी थी, जिसका खामियाजा आज देश भुगत रहा है।
आर्थिक मोर्चे पर चीन का ‘कब्जा’: खड़गे के आंकड़े
कांग्रेस अध्यक्ष ने विभिन्न महत्वपूर्ण आर्थिक और औद्योगिक क्षेत्रों में चीन पर भारत की बढ़ती निर्भरता को लेकर कुछ चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए:
- व्यापार घाटा : गलवान की घटना के बाद से, वर्ष 2025-26 तक चीन से होने वाले आयात में 101.81% की भारी बढ़ोतरी हुई है। इसके कारण भारत का व्यापार घाटा बढ़कर $112.1 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
- दवाइयां और फार्मा : भारत के कुल एंटीबायोटिक आयात में चीन की हिस्सेदारी 86% है। इसके अलावा, दवाओं को बनाने के लिए जरूरी बल्क ड्रग्स और API (एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स) के मामले में चीन 2024-25 में 74% बाजार पर कब्जा जमाए हुए है।
- इलेक्ट्रिक वाहन : भारतीय ईवी कंपोनेंट्स (पुर्जों) का 66% आयात आज भी चीन से होता है। वहीं, गाड़ियों को चलाने वाली लिथियम-आयन बैटरी का लगभग 75% हिस्सा और परमानेंट मैग्नेट का 93% (2025-26 में) चीन से ही आयात किया जा रहा है।
- सौर ऊर्जा : खड़गे ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सौर सेल की बुनियाद माने जाने वाले ‘अनडिफ्यूज्ड सिलिकॉन वेफर’ के आयात में चीन की हिस्सेदारी 99% से अधिक है।
“हमारे वीर जवानों ने शहादत चुनी, लेकिन मोदी सरकार ने भारत के हितों को चीन के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। मोदी सरकार ने गलवान के बाद से बीजिंग को भारत के सबसे महत्वपूर्ण उद्योगों पर कब्जा करने देकर राष्ट्रीय हितों को गंभीर चोट पहुंचाई है।”
— मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस अध्यक्ष
चीनी कंपनियों को ‘रेड कार्पेट’ देने का आरोप
खड़गे ने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि देश की सुरक्षा और सीमाओं पर तनाव के बावजूद, हाल ही में नियमों में ढील देकर चीन से जुड़ी चार कंपनियों को भारत के सरकारी बिजली प्रोजेक्ट्स (Power Projects) में बोली लगाने की अनुमति दी गई है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी इस कदम को सरकार का “कैलिब्रेटेड कैपिटुलेशन” (सोचा-समझा आत्मसमर्पण) करार दिया है।
सीमा पर स्थिति और सरकार का रुख
विपक्ष ने नागरिक समाज की रिपोर्टों का हवाला देते हुए अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में चीनी घुसपैठ का मुद्दा भी उठाया।दूसरी ओर, केंद्र सरकार और सेना ने हमेशा इन दावों का खंडन किया है। भारतीय सेना ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी अतिक्रमण की खबरों को पूरी तरह “गलत और निराधार” बताया है। वर्तमान में दोनों देश राजनयिक और सैन्य तंत्र के माध्यम से सीमाओं पर शांति बनाए रखने के लिए बातचीत कर रहे हैं, जिसके तहत हाल ही में बीजिंग में WMCC (Working Mechanism for Consultation and Coordination) की 35वीं बैठक भी आयोजित की गई थी।
मुख्य स्रोत: एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI)
