अयोध्या: राम मंदिर में दान में मिली सोने-चांदी की कीमती वस्तुओं के कथित रूप से गायब होने के मामले में जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की रिपोर्ट ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को बड़ी राहत दी है। जांच में दान की गई चांदी और अन्य कीमती वस्तुओं की चोरी या बड़े स्तर पर गड़बड़ी के आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर को प्राप्त सभी मूल्यवान वस्तुओं का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा गया है।
SIT रिपोर्ट में क्या सामने आया?
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर में दान के रूप में प्राप्त सोने-चांदी की वस्तुओं के गायब होने का कोई प्रमाण नहीं मिला। जांच में यह भी संकेत मिला कि ट्रस्ट के स्तर पर किसी संगठित साजिश या सुनियोजित चोरी के सबूत नहीं हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यदि कहीं कोई समस्या रही भी है तो वह कुछ व्यक्तियों की कथित लापरवाही या प्रशासनिक कमियों तक सीमित है।
944 किलो चांदी को बनाया गया सिल्वर बार
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, श्रद्धालुओं द्वारा दान में मिली चांदी की वस्तुओं और आभूषणों को सुरक्षित संरक्षण के उद्देश्य से पिघलाकर चांदी की सिल्लियों (Silver Bars) में बदला गया है।
रिपोर्ट के अनुसार—
- मंदिर को अब तक लगभग 32.2 किलोग्राम सोने की वस्तुएं प्राप्त हुई हैं।
- करीब 1195 किलोग्राम चांदी दान में मिली।
- इनमें से 944 किलोग्राम चांदी को पिघलाकर सिल्वर बार में परिवर्तित किया जा चुका है।
- यह प्रक्रिया सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SPMCIL) की सहायता से पूरी की गई।
दान की सभी वस्तुओं का रिकॉर्ड सुरक्षित
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने बताया कि अब तक प्राप्त 2,926 मूल्यवान दान वस्तुओं का पूरा रिकॉर्ड ट्रस्ट के पास उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि यदि कोई श्रद्धालु अपने द्वारा दिए गए दान का विवरण देखना चाहता है, तो वह ट्रस्ट प्रशासन से संपर्क कर रिकॉर्ड का अवलोकन कर सकता है।
5 करोड़ रुपये की रामचरितमानस भी सुरक्षित
दान विवाद के दौरान कुछ लोगों ने दावा किया था कि मंदिर को भेंट की गई कई मूल्यवान वस्तुएं गायब हो गई हैं। इनमें पूर्व केंद्रीय गृह सचिव एस. लक्ष्मीनारायण द्वारा दान की गई लगभग 5 करोड़ रुपये मूल्य की स्वर्ण परतयुक्त रामचरितमानस और चांदी की ‘कागभुशुंडी’ प्रतिमा भी शामिल थीं।
हालांकि, SIT जांच में इन सभी वस्तुओं का रिकॉर्ड ट्रस्ट के पास सुरक्षित पाया गया और इनके गायब होने के आरोप निराधार साबित हुए।
ट्रस्ट में हुआ नेतृत्व परिवर्तन
हाल ही में हुई श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में संगठनात्मक बदलाव भी किए गए। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार करते हुए कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई। कृष्ण मोहन ने कहा कि उनकी प्राथमिकता श्रद्धालुओं का विश्वास और पारदर्शिता को और मजबूत करना होगी।
विश्वास बहाल करने की दिशा में अहम कदम
SIT की रिपोर्ट के बाद राम मंदिर दान विवाद को लेकर उठे कई सवालों पर स्थिति स्पष्ट हुई है। जांच में बड़े स्तर की चोरी या साजिश के आरोपों की पुष्टि नहीं होने से ट्रस्ट को राहत मिली है। अब ट्रस्ट का कहना है कि दान प्रबंधन को और अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए आवश्यक कदम लगातार उठाए जाएंगे।
