लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच गठबंधन और सीट बंटवारे को लेकर बातचीत का मुद्दा लगातार चर्चा में है। कांग्रेस जहां करीब 150 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग कर रही है, वहीं सपा की ओर से 350 सीटों पर अपनी तैयारियां आगे बढ़ाने की बात सामने आई है। ऐसे में दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर अंतर साफ नजर आ रहा है।
350 सीटों पर सपा की तैयारी
रिपोर्टों के मुताबिक, सपा ने उत्तर प्रदेश की कुल 403 विधानसभा सीटों में से करीब 350 सीटों पर संगठनात्मक और चुनावी तैयारियां तेज करने का फैसला किया है। इसे कांग्रेस की ओर से 150 सीटों की मांग के बीच सपा के रुख के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर औपचारिक समझौता अभी सामने नहीं आया है।
सपा की ओर से सीटों के बंटवारे में जीत की संभावना और जमीनी संगठन को आधार बनाने की बात कही गई है। अखिलेश यादव ने हाल ही में कहा था कि गठबंधन रहेगा, लेकिन सीटों का फैसला उन सीटों के आधार पर होना चाहिए जिन्हें संबंधित दल जीतने की स्थिति में हो।
कांग्रेस की 150 सीटों की मांग
दूसरी ओर, कांग्रेस की ओर से यूपी विधानसभा चुनाव में करीब 150 सीटों पर दावेदारी की बात सामने आई है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस ने ऐसी 150 सीटों की पहचान की है जिन्हें वह गठबंधन वार्ता में मांगने की तैयारी में है। कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक, पार्टी सीटों की संख्या पर बातचीत के लिए कुछ लचीलापन दिखा सकती है, लेकिन 100 से कम सीटों पर तैयार नहीं होने की बात भी सामने आई है।
कांग्रेस का तर्क 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों दलों के प्रदर्शन पर आधारित है। 2024 में सपा और कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ा था। रिपोर्ट के मुताबिक, सपा ने 37 और कांग्रेस ने 6 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसी प्रदर्शन को आधार बनाकर कांग्रेस विधानसभा सीटों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग कर रही है।
ओवैसी की डेडलाइन पर अखिलेश का जवाब
इस बीच एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की ओर से विपक्षी गठबंधन में शामिल किए जाने को लेकर दी गई डेडलाइन के बीच अखिलेश यादव ने अपना रुख स्पष्ट किया है। ओवैसी ने 2 अक्टूबर तक सपा-कांग्रेस गठबंधन में एआईएमआईएम को शामिल करने की मांग रखी थी और इसके बाद दूसरे दलों के साथ गठबंधन का संकेत दिया था।
ओवैसी के इस रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि सपा का मौजूदा गठबंधन कांग्रेस के साथ है। बाद में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में वही गठबंधन आगे रहेगा, जो पहले से है। यानी सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन जारी रखने की बात उन्होंने दोहराई है।
राज्यसभा चुनाव से पहले बागियों को भी संदेश
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा चुनाव को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। सपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए राम गोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाया है। चुनाव 16 अक्टूबर को होना है।
इसी बीच अखिलेश यादव ने पार्टी से अलग हो चुके या नाराज नेताओं को भी साथ आने का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव का समय मिलन का समय है और जो लोग लोकतंत्र व संविधान की रक्षा के लिए साथ आना चाहते हैं, उनके लिए कड़वी बातें भूलकर आगे बढ़ने की बात कही।
सपा प्रमुख ने यह भी कहा है कि जो लोग पार्टी में वापस आना चाहते हैं, उनका स्वागत है। इससे संकेत मिलता है कि राज्यसभा चुनाव के साथ-साथ सपा आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिए अपने राजनीतिक संपर्कों को भी मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
सीट बंटवारे पर आगे की राह अहम
फिलहाल सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग सीटों के आंकड़े सामने आ रहे हैं। कांग्रेस 150 सीटों की मांग कर रही है, जबकि सपा 350 सीटों पर अपनी तैयारी कर रही है। अंतिम सीट बंटवारा किन सीटों और किस फॉर्मूले के आधार पर होगा, यह दोनों दलों के बीच होने वाली आगामी बातचीत पर निर्भर करेगा।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के साथ सीट शेयरिंग, गठबंधन में अन्य दलों की भूमिका और राज्यसभा चुनाव के समीकरण आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति के प्रमुख मुद्दों में बने रह सकते हैं।
