सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में जंगली हाथियों की लगातार आवाजाही से परेशान ग्रामीणों का आक्रोश अब सड़क पर उतर आया है। रमकोला, घोई, भेलकच्छ, अर्चोका और घाट क्षेत्र के बड़ी संख्या में ग्रामीण मंगलवार को वन विभाग के घोई कार्यालय पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर हाथी-मानव संघर्ष से राहत दिलाने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में हाथियों की लगातार मौजूदगी के कारण खेतों में खड़ी फसल को नुकसान पहुंच रहा है। वहीं, हाथियों के गांवों के आसपास पहुंचने से लोगों में जान-माल को लेकर डर बना हुआ है। ग्रामीणों ने उत्पाती हाथियों को पकड़कर तमोर पिंगला के रमकोला स्थित हाथी पुनर्वास केंद्र में रखने की मांग की है।
खेतों में पहुंच रहे हाथी, फसल को नुकसान का आरोप
ग्रामीणों के मुताबिक, जंगली हाथियों के झुंड लगातार गांवों और आसपास के इलाकों में पहुंच रहे हैं। हाथियों के खेतों में घुसने से फसलों को नुकसान हो रहा है। कई परिवारों के सामने खेती से होने वाली आय प्रभावित होने की चिंता बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों की आवाजाही के कारण शाम और रात के समय गांवों में विशेष सतर्कता बरतनी पड़ रही है। ग्रामीण चाहते हैं कि वन विभाग हाथियों की निगरानी और उन्हें आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखने के लिए प्रभावी व्यवस्था करे।
मुआवजा बढ़ाने समेत कई मांगें
ज्ञापन के जरिए ग्रामीणों ने फसल नुकसान के मुआवजे में बढ़ोतरी की मांग की है। उन्होंने हाथियों से फसल नुकसान पर मुआवजा राशि 60 हजार रुपये प्रति एकड़ किए जाने की मांग रखी है।
इसके अलावा हाथी के हमले में जनहानि होने पर 50 लाख रुपये मुआवजा या प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की गई है। ग्रामीणों ने कहा कि जिन किसानों की फसल हाथियों ने बर्बाद की है, उन्हें 15 दिनों के भीतर मुआवजा राशि उनके बैंक खातों में पहुंचाई जाए।
ग्रामीणों ने पुराने मामलों में लंबित मुआवजा राशि का भुगतान भी जल्द करने की मांग की है।
एक सप्ताह का अल्टीमेटम, 11 नंबर बनारस रोड पर चक्काजाम की चेतावनी
ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग को अपनी मांगों पर कार्रवाई के लिए एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय में उनकी मांगों पर ठोस पहल नहीं हुई तो 11 नंबर बनारस रोड पर चक्काजाम किया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल भी शुरू की जा सकती है। उनका कहना है कि केवल आश्वासन से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि हाथी-मानव संघर्ष रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था जरूरी है।
हाथी-मानव संघर्ष रोकने स्थायी समाधान की मांग
ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों की आवाजाही पर लगातार निगरानी रखने, आबादी वाले क्षेत्रों में हाथियों के पहुंचने की स्थिति में तत्काल सूचना और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने तथा फसल नुकसान का समय पर आकलन करने की मांग की है।
अब ग्रामीणों के अल्टीमेटम के बाद वन विभाग और प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर बनी हुई है। यदि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीणों के आंदोलन के अगले चरण में जाने की संभावना है।
