रायपुर। राजधानी रायपुर की बढ़ती आबादी और भविष्य की पेयजल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए गजराज बांध को शहर की नई “लाइफलाइन” बनाने की दिशा में पहल शुरू हो गई है। राज्यपाल रमेन डेका ने कमल विहार स्थित करीब 230 एकड़ क्षेत्र में फैले गजराज बांध को बड़े पेयजल जलाशय के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
- राज्यपाल ने बुलाई अहम बैठक
बुधवार को लोकभवन में आयोजित बैठक में राज्यपाल ने महापौर मीनल चौबे और नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त विनोद पाण्डेय के साथ इस महत्वाकांक्षी योजना पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में रायपुर की वर्तमान और भविष्य की जल आवश्यकताओं को देखते हुए गजराज बांध के उपयोग और विकास की संभावनाओं पर विचार किया गया।
- पेयजल संकट के समाधान की दिशा में पहल
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि वर्तमान में गजराज बांध का सिंचाई कार्यों में प्रभावी उपयोग नहीं हो रहा है। यदि इसकी आवश्यक मरम्मत और आधारभूत विकास कार्य किए जाएं तो इसे रायपुर शहर के लिए एक महत्वपूर्ण पेयजल स्रोत के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे राजधानी को शुद्ध और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
- विभागों के समन्वय से आगे बढ़ेगी योजना
उन्होंने महापौर मीनल चौबे को संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर प्रस्ताव को जल्द आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। राज्यपाल ने कहा कि बढ़ती आबादी और जल संकट की संभावित चुनौतियों को देखते हुए दीर्घकालिक योजना के तहत ठोस कदम उठाना आवश्यक है।
- बढ़ती आबादी के बीच दूरगामी सोच
गौरतलब है कि रायपुर की आबादी लगातार बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में पेयजल की मांग में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। ऐसे में खारुन नदी के अलावा गजराज बांध को पेयजल भंडारण केंद्र के रूप में विकसित करने की यह पहल राजधानी की जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
- भविष्य में बन सकता है दूसरी बड़ी जल लाइफलाइन
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना सफल होती है तो गजराज बांध भविष्य में रायपुर की दूसरी बड़ी जल लाइफलाइन बन सकता है और शहर की पेयजल व्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करेगा।
