जम्मू: श्री माता वैष्णो देवी श्राइन में भक्तों द्वारा चढ़ाई गई करीब 500 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की चांदी में कथित मिलावट और संभावित गड़बड़ी के मामले में जम्मू की अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (CJM) मुनीश कुमार मन्हास की अदालत ने क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारी को मामले से जुड़े सभी आवश्यक रिकॉर्ड के साथ 29 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है।यह मामला उस शिकायत के आधार पर सामने आया है, जिसमें मंदिर में चढ़ाई गई चांदी के कथित रूप से नकली या मिलावटी पाए जाने, उसे बदलने और संभावित गबन की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि मामले में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, रिकॉर्ड में हेरफेर और कैडमियम युक्त सामग्री के इस्तेमाल जैसी गंभीर अनियमितताओं की आशंका है।
क्राइम ब्रांच की कार्रवाई पर उठे सवाल
शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता दीपक शर्मा ने पहले क्राइम ब्रांच, जम्मू के अधिकारियों के समक्ष विस्तृत शिकायत दर्ज कराई थी। उनका कहना है कि शिकायत में संज्ञेय अपराधों का उल्लेख होने के बावजूद समय पर FIR दर्ज नहीं की गई और न ही प्रभावी जांच शुरू हुई। इसके बाद उन्होंने अदालत का रुख किया।सुनवाई के दौरान क्राइम ब्रांच ने अदालत में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर बताया कि शिकायत को आवश्यक मंजूरी के लिए श्रीनगर स्थित मुख्यालय भेजा गया था और मंजूरी मिलने के बाद उसे आगे की कार्रवाई के लिए जोनल पुलिस मुख्यालय, जम्मू भेज दिया गया।
हालांकि शिकायतकर्ता ने इस रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए कहा कि केवल शिकायत को एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय भेज देना कानून के तहत अपेक्षित कार्रवाई नहीं माना जा सकता। उनका तर्क था कि क्राइम ब्रांच का इकोनॉमिक ऑफेंस विंग स्वयं एक अधिसूचित पुलिस स्टेशन है और उसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के तहत शिकायत पर विधिसम्मत कार्रवाई करनी चाहिए थी।
कोर्ट ने मांगे अहम दस्तावेज
अदालत में दाखिल आपत्तियों में यह भी कहा गया कि स्टेटस रिपोर्ट में महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए उठाए गए कदमों का कोई उल्लेख नहीं है। इनमें चांदी से संबंधित इन्वेंट्री रजिस्टर, स्टॉक रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, डिस्पैच और ट्रांसपोर्टेशन दस्तावेज, शुद्धता जांच (Assay) रिपोर्ट, टकसाल से जुड़ा पत्राचार तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड शामिल हैं।इन दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई पर सभी संबंधित रिकॉर्ड के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों।
क्या है पूरा विवाद?
मामले की शुरुआत उन रिपोर्टों के बाद हुई, जिनमें दावा किया गया कि मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाई गई करीब 20 टन चांदी, जिसकी अनुमानित कीमत 550 करोड़ रुपये बताई गई, उसे परीक्षण, पिघलाने और प्रोसेसिंग के लिए भेजा गया था। परीक्षण के दौरान कथित तौर पर केवल 5 से 6 प्रतिशत चांदी ही शुद्ध पाई गई, जबकि शेष सामग्री में कैडमियम, लोहा और अन्य धातुओं की मिलावट होने का दावा किया गया।
इसी आधार पर शिकायतकर्ता ने मांग की है कि यह स्पष्ट किया जाए कि क्या श्रद्धालुओं को शुरुआत से ही मिलावटी चांदी बेची गई थी या फिर मंदिर की इन्वेंट्री, भंडारण, परिवहन, जांच अथवा पिघलाने की प्रक्रिया के दौरान असली चांदी के साथ छेड़छाड़ या अदला-बदली हुई।
सप्लाई चेन की जांच की भी मांग
शिकायत में कैडमियम युक्त कथित सामग्री के स्रोत, उसके निर्माण, खरीद और सप्लाई चेन की गहन जांच की मांग की गई है। साथ ही इस पूरे मामले में यदि किसी अधिकारी, कस्टोडियन, विक्रेता, सप्लायर, हैंडलर या ट्रांसपोर्टर की भूमिका सामने आती है, तो उनकी जिम्मेदारी तय कर कानूनी कार्रवाई करने की भी मांग की गई है।
अब इस बहुचर्चित मामले में 29 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं। अदालत के समक्ष जांच अधिकारी द्वारा पेश किए जाने वाले रिकॉर्ड और आगे की कार्रवाई इस मामले की दिशा तय कर सकती है।
