नई दिल्ली: देश के आम आदमी की जेब पर दबाव बढ़ता दिख रहा है। मई महीने में खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने के कारण रिटेल (खुदरा) महंगाई दर में तेजी दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मई में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.93 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो कि अप्रैल महीने में 3.48 प्रतिशत थी।
महंगाई में आई इस तेजी के पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को मुख्य कारण माना जा रहा है।
मुख्य बिंदु: आर्थिक आंकड़े एक नज़र में
- मई की महंगाई दर: 3.93% (अप्रैल में 3.48% थी)।
- राहत की बात: लगातार 16वें महीने महंगाई दर RBI के 4% के अनिवार्य लक्ष्य से नीचे रही।
- बड़ा कारण: ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के चलते वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल।
- भारतीय जीडीपी (GDP): वैश्विक संकट के बावजूद भारत की आर्थिक विकास दर 7.8% पर मजबूत बनी हुई है।
ईरान युद्ध और कच्चे तेल के झटके से बढ़ा दबाव
आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक, मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे ईरान, अमेरिका और इजरायल युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। तेल महंगा होने का सीधा असर माल ढुलाई (Transportation) पर पड़ता है, जिससे हर क्षेत्र में लागत बढ़ जाती है। इस वैश्विक तनाव का असर भारतीय करेंसी मार्केट (रुपये की कीमत) पर भी साफ देखा जा रहा है।
खाने-पीने की चीजों ने बिगाड़ा बजट
मई महीने में खुदरा महंगाई यानी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) में आई तेजी की सबसे बड़ी वजह खाद्य पदार्थों (Food Items) की बढ़ती कीमतें हैं। रसोई के बजट में हुई इस बढ़ोतरी ने सीधे तौर पर रिटेल महंगाई के ग्राफ को ऊपर खींच दिया है।
RBI ने बढ़ाया महंगाई का अनुमान
महंगाई के इस बदलते रुख को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी अपनी तैयारी शुरू कर दी है। जून की मौद्रिक नीति (Monetary Policy) समीक्षा में केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई दर के अनुमान में संशोधन किया है।
झटकों के बाद भी भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत
वैश्विक स्तर पर जारी उथल-पुथल और घरेलू बाजार में महंगाई के दबाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी ढांचे (Fundamentals) ने देश को संभाला हुआ है। दुनिया भर की मंदी और युद्ध के हालातों के बीच भी भारत की जीडीपी (GDP) विकास दर 7.8 प्रतिशत के उच्च स्तर पर बनी हुई है, जो यह दर्शाती है कि बाहरी झटकों को झेलने में देश की अर्थव्यवस्था काफी सक्षम है।