नई दिल्ली/गाजियाबाद: गुरुवार की रात दिल्ली-एनसीआर के गाजियाबाद इलाके में रहने वाले हजारों लोग उस वक्त दहशत में आ गए, जब अचानक उनके मोबाइल फोन एक तेज सायरन और कंपन (Vibration) के साथ फ्रीज हो गए। मौसम की चेतावनी देने के लिए सरकार के नए इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन देर रात आए इस ‘अति गंभीर’ संदेश ने राहत देने के बजाय लोगों को डरा दिया। अब इस बात को लेकर बहस छिड़ गई है कि क्या सामान्य आंधी-तूफान के लिए इतने बड़े अलर्ट सिस्टम का उपयोग जायज है?
मुख्य बिंदु: खबर एक नज़र में
- घटना का समय: गुरुवार रात ठीक 10:57 बजे।
- क्या हुआ: मोबाइल स्क्रीन ब्लॉक हो गईं, तेज सायरन बजा और फोन लगातार वाइब्रेट होने लगे।
- अलर्ट का संदेश: “Extremely Severe Alert- अगले 3 घंटों में 70-100 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी, तूफान और ओले गिरने की संभावना।”
- विवाद की वजह: मौसम विभाग का अनुमान ‘मध्यम’ बारिश का था, लेकिन अलर्ट ‘अति गंभीर’ (Extremely Severe) श्रेणी का भेजा गया।
जब अचानक थम गईं मोबाइल स्क्रीनें
रात करीब 11 बजे जब लोग सोने की तैयारी कर रहे थे या फोन इस्तेमाल कर रहे थे, तभी अचानक उनके फोन की स्क्रीन पर एक इमरजेंसी पॉप-अप आया। इस दौरान फोन के बाकी सभी ऑपरेशन्स ब्लॉक हो गए और जब तक यूजर ने ‘ओके’ (OK) पर क्लिक नहीं किया, तब तक फोन सामान्य नहीं हुआ। इस अचानक हुए सायरन और कंपन से घरों में सो रहे बच्चे और बुजुर्ग भी सहम गए।
‘सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम’ से भेजा गया था मैसेज
यह चेतावनी संदेश भारत सरकार के नए टेलीकॉम-आधारित पब्लिक वॉर्निंग सिस्टम यानी ‘सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम’ के जरिए भेजा गया था। यह तकनीक एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र (Geo-targeted) में मौजूद सभी मोबाइल डिवाइस पर एक साथ इमरजेंसी मैसेज भेजने के लिए बनाई गई है, ताकि किसी बड़ी आपदा (जैसे भूकंप या सुनामी) के समय लाखों लोगों की जान बचाई जा सके।
मौसम विभाग के अनुमान और अलर्ट में बड़ा अंतर
इस पूरी घटना के बाद सरकार के इस सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक:
| विभाग | जारी किया गया पूर्वानुमान / अलर्ट |
| भारत मौसम विभाग (IMD) | गाजियाबाद के मोदीनगर के लिए ‘Moderate’ (मध्यम) बारिश और आंधी का अनुमान (हवा की गति 50-90 किमी/घंटा)। |
| इमर्जेंसी अलर्ट सिस्टम | जनता के मोबाइल पर ‘Extremely Severe Alert’ (अति गंभीर) का संदेश (हवा की गति 70-100 किमी/घंटा)। |
विशेषज्ञों और आम जनता का कहना है कि जब मौसम विभाग का अनुमान सिर्फ ‘मध्यम’ दर्जे की आंधी-बारिश का था, तो सिस्टम ने इसे ‘अति गंभीर’ श्रेणी में क्यों बदला?
क्या SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) तय करने की है जरूरत?
इस घटना ने नीति निर्माताओं के सामने कुछ बेहद अहम सवाल खड़े कर दिए हैं:
- क्या रात के 11 बजे किसी सामान्य आंधी-तूफान के लिए “Extremely Severe Alert” भेजना उचित था?
- क्या बार-बार ऐसे सामान्य मौसम पर इतने गंभीर सायरन बजाने से भविष्य में लोग असली आपदा के समय भी इस अलर्ट को गंभीरता से लेना बंद नहीं कर देंगे?