कोलकाता, 22 जून। कोलकाता नगर निगम (KMC) द्वारा पार्क सर्कस क्षेत्र स्थित सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी Road किए जाने के फैसले ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस निर्णय को लेकर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC) और CPI(M) ने एक सुर में विरोध जताया है, जबकि भाजपा इसे “ऐतिहासिक भूल सुधारने” का कदम बता रही है।
- नगर निगम ने जारी की अधिसूचना
नगर निगम की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, KMC क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सुहरावर्दी एवेन्यू को अब आधिकारिक तौर पर गोपाल मुखर्जी रोड के नाम से जाना जाएगा। भाजपा नेताओं का दावा है कि यह फैसला लंबे समय से चली आ रही ऐतिहासिक विसंगति को दूर करने के लिए लिया गया है।
- विपक्ष ने फैसले पर उठाए सवाल
हालांकि विपक्षी दलों ने इस कदम पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। कांग्रेस, TMC और CPI(M) का आरोप है कि सड़क का नाम बदलने का निर्णय राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित है और इतिहास को गलत तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिश की जा रही है।
- महुआ मोइत्रा ने साधा निशाना
TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सुहरावर्दी एवेन्यू का संबंध जिस व्यक्ति से जोड़ा जा रहा है, उसके बारे में जानबूझकर भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इतिहास के तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है।
- CPI(M) ने बताया ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़
वहीं CPI(M) ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यह एक “ऐतिहासिक रूप से गलत धारणा” पर आधारित है। पार्टी का कहना है कि सड़क का नाम जिस सुहरावर्दी के नाम पर रखा गया था, उसके बारे में गलत जानकारी देकर नाम परिवर्तन को उचित ठहराया जा रहा है। CPI(M) ने मांग की है कि इस फैसले को तत्काल वापस लिया जाए और पूरे मामले की ऐतिहासिक सच्चाई जनता के सामने रखी जाए।
- राजनीति में बढ़ सकती है बहस
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सड़क के नाम को लेकर शुरू हुआ यह विवाद आने वाले दिनों में और गहरा सकता है। पश्चिम बंगाल में पहचान, इतिहास और राजनीतिक विरासत से जुड़े मुद्दे पहले भी चुनावी और सामाजिक बहस का केंद्र रहे हैं। ऐसे में सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलने का मामला भी राज्य की राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकता है।
- फिलहाल विवाद जारी
फिलहाल, सड़क का नया नाम लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन विपक्षी दलों के विरोध और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच यह मुद्दा राज्य की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।
