नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा सेंटर की संख्या और क्षमता तेजी से बढ़ रही है। इससे बिजली की मांग में भी इजाफा हो रहा है और कई क्षेत्रों के पावर ग्रिड पर दबाव बढ़ रहा है।
डेटा सेंटर में सर्वर को लगातार चलाने और उन्हें ठंडा रखने के लिए बड़ी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है। एआई के विस्तार के साथ यह मांग आने वाले वर्षों में और बढ़ने की संभावना है, जिससे बिजली उत्पादन के साथ-साथ ट्रांसमिशन और वितरण व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी हो गया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक केवल नए बिजली संयंत्र और ट्रांसमिशन लाइनें बनाना ही पर्याप्त नहीं होगा। स्मार्ट ग्रिड तकनीक, बैटरी स्टोरेज और डिमांड मैनेजमेंट के जरिए बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच बेहतर संतुलन बनाया जा सकता है।
स्मार्ट ग्रिड की मदद से बिजली के इस्तेमाल की निगरानी और वितरण को अधिक कुशल बनाया जा सकेगा। इससे डेटा सेंटर की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ पावर ग्रिड पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
