नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण में ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के बयान पर सवाल उठाते हुए इसे सरकार की बढ़ती नाराज़गी और राजनीतिक दबाव का नतीजा बताया है। इस बीच केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बचाव में उतरने के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने उन पर तीखा पलटवार किया है।
पवन खेड़ा ने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए इसे “PR के लिहाज़ से बड़ी नाकामी” बताया। खेड़ा के मुताबिक, विवाद बढ़ने के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का स्पष्टीकरण देना इस पूरे मामले में डैमेज कंट्रोल की कोशिश नजर आता है।
रिजिजू ने कांग्रेस को बताया ‘माओवादी पार्टी’
वहीं, किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी धीरे-धीरे “माओवादी पार्टी” में बदलती जा रही है। रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का ‘दिमागी नक्सल’ वाला बयान किसी खास विपक्षी दल को निशाना बनाकर नहीं दिया गया था, बल्कि उनका इशारा उन लोगों की ओर था जो माओवादी या अलगाववादी विचारधारा का समर्थन करते हैं।
रिजिजू ने यह भी दावा किया कि नक्सलवाद का खतरा सिर्फ जंगलों में हथियार उठाने वालों तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसी विचारधारा रखने वाले लोग शहरी इलाकों में भी मौजूद हैं। उनके मुताबिक, ऐसी मानसिकता की पहचान कर उससे निपटना जरूरी है।
विवाद को शांत करने की कोशिश या डैमेज कंट्रोल?
कांग्रेस का आरोप है कि प्रधानमंत्री के बयान के बाद सरकार को राजनीतिक प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ रहा है और इसी वजह से रिजिजू सफाई देने के लिए सामने आए हैं। पवन खेड़ा का कहना है कि जिस बयान को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस छिड़ गई, उसे बाद में अलग अर्थ देकर समझाने की कोशिश की जा रही है।
इससे पहले भी खेड़ा ने रिजिजू के एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर तंज कसा था। रिजिजू ने ‘दिमागी नक्सल’ की श्रेणियां बताते हुए अपनी सूची में 1 और 2 के बाद सीधे 4 नंबर लिखा था। इस पर खेड़ा ने चुटकी लेते हुए कहा था कि “1, 2 के बाद 3 आता है, 4 नहीं।”
‘दिमागी नक्सल’ पर क्यों मचा है विवाद?
प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से दिए अपने भाषण में कहा था कि हथियार उठाने वाले नक्सलवाद को काफी हद तक खत्म किया जा चुका है, लेकिन देश में ऐसे ‘दिमागी नक्सल’ भी मौजूद हैं जो विचारधारा के जरिए समाज और संस्थाओं को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। इस टिप्पणी के बाद विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधना शुरू कर दिया।
कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने तो तंज कसते हुए खुद को “दिमागी नक्सल” कहने पर गर्व जताया, जिसके बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच बयानबाजी और तेज हो गई।
