बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बच्चे के भरण-पोषण से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने DNA जांच में तीन साल के बच्चे का जैविक पिता साबित हुए युवक को बच्चे के भरण-पोषण के लिए हर महीने 5 हजार रुपए देने का आदेश दिया है। यह राशि 1 सितंबर 2026 से देय होगी।
हालांकि, हाईकोर्ट ने बच्चे की मां की ओर से की गई भरण-पोषण की मांग को स्वीकार नहीं किया।
DNA जांच में साबित हुआ पितृत्व
मामला तिफरा निवासी महिला और सीपत निवासी युवक से जुड़ा है। महिला ने आरोप लगाया था कि युवक ने शादी का झांसा देकर उसके साथ संबंध बनाए और बच्चे के जन्म के बाद पिता होने से इनकार कर दिया।
मामले में महिला ने भरण-पोषण की मांग को लेकर फैमिली कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान बच्चे के पितृत्व को लेकर DNA जांच कराई गई। जांच में युवक को तीन साल के बच्चे का जैविक पिता पाया गया।
फैमिली कोर्ट के फैसले के बाद हाईकोर्ट पहुंचा मामला
DNA रिपोर्ट के बावजूद फैमिली कोर्ट ने महिला की भरण-पोषण याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद महिला ने फैमिली कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों और DNA जांच के परिणाम पर विचार करते हुए बच्चे के भरण-पोषण के अधिकार को प्राथमिकता दी। कोर्ट ने जैविक पिता को बच्चे के लिए हर महीने 5 हजार रुपए देने का आदेश दिया।
मां को भरण-पोषण देने की मांग स्वीकार नहीं
हाईकोर्ट ने जहां बच्चे के भरण-पोषण की मांग को स्वीकार किया, वहीं महिला की व्यक्तिगत भरण-पोषण की मांग को मंजूरी नहीं दी। कोर्ट के आदेश के अनुसार, बच्चे के लिए निर्धारित 5 हजार रुपए की मासिक राशि 1 सितंबर 2026 से देनी होगी।
बच्चे के अधिकार को दी प्राथमिकता
फैसले में हाईकोर्ट ने बच्चे के भरण-पोषण के अधिकार को महत्वपूर्ण माना। DNA जांच से पितृत्व साबित होने के बाद पिता को बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से अलग नहीं किया जा सकता।
