नई दिल्ली। दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों के प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने गंभीर आरोप लगाए हैं। केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि प्रदर्शन के दौरान ड्यूटी पर तैनात महिला पुलिसकर्मियों के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़, मारपीट और दुर्व्यवहार किया गया। इस मामले में प्रदर्शन की अनुमति और पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी अदालत में दलीलें रखी गईं।
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दावा किया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में हुआ प्रदर्शन बिना आधिकारिक अनुमति के आयोजित किया गया था। उन्होंने अदालत से प्रदर्शन के दौरान के वीडियो फुटेज देखने का आग्रह करते हुए आरोप लगाया कि महिला पुलिसकर्मियों के साथ बदसलूकी की गई, उन्हें चोट पहुंचाई गई और गालियां दी गईं।
केंद्र सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान संयम बरता। हालांकि, महिला पुलिसकर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार से जुड़े आरोपों की स्थिति को अदालत में पेश की गई दलीलों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर विवाद
यह मामला मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। विपक्षी नेताओं ने कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर विरोध जताने के लिए जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प होने की बात सामने आई।
विपक्षी दलों का आरोप है कि सुरक्षा प्रतिबंधों के जरिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को प्रभावित किया जा रहा है। वहीं, केंद्र सरकार ने कानून-व्यवस्था और पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर अपनी दलीलें रखी हैं।
प्रदर्शन के अधिकार और आम जनता की सुविधा पर चर्चा
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान विरोध प्रदर्शन के अधिकार और आम लोगों की आवाजाही के बीच संतुलन का मुद्दा भी सामने आया। अदालत के समक्ष यह सवाल है कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखते हुए नागरिकों को विरोध दर्ज कराने का अधिकार किस तरह सुनिश्चित किया जाए और आम जनता की आवाजाही तथा जरूरी सुविधाएं प्रभावित न हों।
आरोपों के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल
महिला पुलिसकर्मियों के साथ कथित बदसलूकी का मुद्दा सामने आने के बाद इस प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एक ओर केंद्र सरकार ने पुलिसकर्मियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है, वहीं विपक्षी दल विरोध प्रदर्शन के अधिकार और चुनाव से जुड़े अपने सवालों पर जोर दे रहे हैं।
अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और आगे होने वाली कार्यवाही पर नजर रहेगी। महिला पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जा सकेगा।
