ढाका/बीजिंग: बांग्लादेश के प्रधानमंत्री Tarique Rahman की आगामी चीन यात्रा को दक्षिण एशिया की राजनीति और कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरे के दौरान बांग्लादेश और चीन के बीच करीब 15 से 17 द्विपक्षीय समझौतों और समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। इनमें बुनियादी ढांचे, तकनीक, क्षेत्रीय संपर्क और आर्थिक सहयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल हैं।
- बांग्लादेश-चीन रिश्तों को मिलेगी नई मजबूती
सबसे अधिक चर्चा तीस्ता नदी परियोजना को लेकर हो रही है। बांग्लादेश के विदेश सचिव Asad Alam Siam ने संकेत दिए हैं कि प्रधानमंत्री की चीन यात्रा के दौरान तीस्ता नदी के पुनरुद्धार और प्रबंधन परियोजना पर भी विस्तार से बातचीत होगी। यह परियोजना लंबे समय से भारत और बांग्लादेश के बीच जल बंटवारे से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा रही है।
- तीस्ता परियोजना पर चीन की बढ़ती दिलचस्पी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तीस्ता परियोजना में चीन की भूमिका बढ़ती है, तो इसका असर क्षेत्रीय रणनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है। भारत पहले से ही तीस्ता जल बंटवारे के मुद्दे पर सतर्क रुख अपनाता रहा है। ऐसे में इस परियोजना में चीन की संभावित भागीदारी नई भू-राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दे सकती है।
- शी जिनपिंग और ली कियांग से होगी अहम मुलाकात
चीन दौरे के दौरान प्रधानमंत्री रहमान की 25 जून को चीनी प्रधानमंत्री Li Qiang के साथ द्विपक्षीय वार्ता निर्धारित है। इसके बाद 26 जून को उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping से होगी। माना जा रहा है कि इन बैठकों में आर्थिक सहयोग, निवेश और क्षेत्रीय विकास परियोजनाओं पर विशेष जोर रहेगा।
- मलेशिया से शुरू होगा विदेश दौरा
बांग्लादेश की इस विदेश यात्रा का पहला पड़ाव Malaysia होगा, जहां श्रम बाजार, व्यापार और निवेश से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। मलेशिया में कार्यरत बांग्लादेशी श्रमिकों से मिलने वाला विदेशी मुद्रा प्रवाह ढाका की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
- आर्थिक चुनौतियों के बीच चीन से बड़ी उम्मीदें
वहीं चीन यात्रा का मुख्य फोकस बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा विकास, आधुनिक तकनीक और वित्तीय सहयोग हासिल करना है। आर्थिक दबाव और विदेशी मुद्रा भंडार की चुनौतियों से जूझ रहे बांग्लादेश को चीन से निवेश और वित्तीय सहायता की उम्मीद है।
- दक्षिण एशिया की राजनीति पर पड़ सकता है असर
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह यात्रा केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिण एशिया में बदलते कूटनीतिक समीकरणों का भी संकेत देती है। आने वाले दिनों में चीन और बांग्लादेश के बीच होने वाले समझौते पूरे क्षेत्र की रणनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।
