पटना/आरा: भोजपुर (आरा) के शाहपुर में हुए युवा सामाजिक कार्यकर्ता भरत भूषण तिवारी के कथित पुलिस एनकाउंटर को लेकर बिहार की सियासत में भूचाल आ गया है। इस संवेदनशील मुद्दे पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के घटक दल ही आपस में आमने-सामने आ गए हैं। एक तरफ जहां केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इस घटना को अत्यंत ‘निंदनीय’ बताते हुए परिवार को न्याय दिलाने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से गुहार लगाई है, वहीं दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने बिहार पुलिस की कार्रवाई को पूरी तरह ‘जस्टिफाइड’ (न्यायसंगत) ठहराकर नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है।
एनडीए में दो फाड़: मांझी की ‘शाबाशी’ बनाम चिराग का ‘विरोध’
जहानाबाद पहुंचे केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने पुलिस का खुलकर बचाव किया। उन्होंने जाति और धर्म के आधार पर इस एनकाउंटर को राजनीतिक रंग देने वालों पर तीखा हमला बोला। मांझी ने कहा, “आए दिन अपराधी पुलिस को पीट रहे हैं। अगर कोई पुलिस पर हथियार तानेगा या गोली चलाएगा, तो पुलिस हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठेगी। मृतक के परिजन कह रहे हैं कि वह मानसिक रूप से विक्षिप था, तो मेरा सवाल है कि परिवार ने उसके हाथ में रिवॉल्वर क्यों रहने दी? उसे छीना क्यों नहीं?” मांझी ने आगे सवाल उठाते हुए कहा कि ‘दलित और मुस्लिम’ अपराधियों के एनकाउंटर पर राजनीति अलग होती है और इस मामले पर अलग रवैया क्यों अपनाया जा रहा है?
इसके ठीक विपरीत, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के मुखिया चिराग पासवान ने पुलिसिया थ्योरी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। चिराग ने कहा कि युवक द्वारा हथियार फेंकने और आत्मसमर्पण (Surrender) की बात करने के बावजूद उस पर गोलियां चलाना बेहद गंभीर और निंदनीय मामला है। चिराग पासवान ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवार के लिए सुरक्षा की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा फर्जी एनकाउंटर का विवाद
इस बीच, भरत तिवारी एनकाउंटर का यह हाई-प्रोफाइल मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर पहुंच चुका है। अदालत में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल कर बिहार पुलिस के दावों को पूरी तरह फर्जी बताया गया है। याचिका में मांग की गई है कि:
- इस पूरे कथित एनकाउंटर की जांच बिहार पुलिस या स्थानीय प्रशासन के बजाय सीबीआई (CBI) को सौंपी जाए।
- मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए एक विशेषज्ञ जांच समिति का गठन हो।
- संलिप्त पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल हत्या का मुकदमा (FIR) दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
फेसबुक लाइव और सरेंडर का वो ‘आखिरी वीडियो’
भोजपुर के बिलौटी गांव में 17 जून को हुए इस एनकाउंटर का जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, उसने पुलिस प्रशासन को बैकफुट पर धकेल दिया है। वीडियो में दिख रहा है कि मौत से ठीक पहले भरत तिवारी फेसबुक लाइव कर रहा था और उसने अपनी पिस्टल पुलिस की तरफ फेंककर खुद को सरेंडर करने की बात कही थी। परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि लाइव बंद होने के तुरंत बाद पुलिस ने निहत्थे भरत तिवारी पर ताबड़तोड़ 4 गोलियां बरसा दीं।
जनाक्रोश के आगे झुकी सरकार, थानाध्यक्ष समेत कई सस्पेंड
इस कथित फर्जी एनकाउंटर के बाद पूरे आरा में भारी जनआक्रोश भड़क उठा था। हजारों की भीड़ ने शव को सड़क पर रखकर आरा-बक्सर फोरलेन को घंटों जाम रखा, जिस पर पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा था। चौतरफा सामाजिक और राजनीतिक दबाव को देखते हुए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जहां इस मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं, वहीं शाहपुर के थानाध्यक्ष (SHO), सब-इंस्पेक्टर सहित आधा दर्जन पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया जा चुका है।
अब देखना यह होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है, लेकिन जीतन राम मांझी के इस बेबाक बयान ने बिहार एनडीए के भीतर जारी खींचतान को सरेआम उजागर कर दिया है।
