महासमुंद। जिले में धान खरीदी व्यवस्था में बड़े पैमाने पर अनियमितता का मामला सामने आया है। वर्ष 2025-26 के धान उपार्जन सीजन के बाद हुए भौतिक सत्यापन में खुलासा हुआ कि 54 खरीदी केंद्रों से 57,860.47 क्विंटल धान गायब है। समर्थन मूल्य 3,100 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से इस धान की कीमत करीब 17.93 करोड़ रुपए आंकी गई है। हैरानी की बात यह है कि सरकारी रिकॉर्ड में धान का पूरा स्टॉक दर्ज है, जबकि मौके पर फड़ पूरी तरह खाली मिले।
जिले के 182 धान खरीदी केंद्रों में कुल 1,01,95,681.20 क्विंटल धान खरीदी दर्ज की गई थी। मिलर्स द्वारा धान उठाव के बाद जितना स्टॉक केंद्रों में बचना चाहिए था, वह भौतिक सत्यापन के दौरान मौजूद नहीं मिला। इस खुलासे ने धान खरीदी व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कार्रवाई केवल दो केंद्रों तक सीमित
इतने बड़े घोटाले के बावजूद प्रशासन ने अब तक केवल आरंगी और बम्हनी सहकारी समितियों के प्रभारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। जबकि शेष 52 संदिग्ध केंद्रों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे पूरे मामले में प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
निगरानी व्यवस्था भी घेरे में
धान खरीदी केंद्रों की निगरानी के लिए प्रत्येक केंद्र पर नोडल अधिकारी और मॉनिटरिंग अधिकारी नियुक्त किए जाते हैं। नियमित भौतिक सत्यापन की भी व्यवस्था है। इसके बावजूद करोड़ों रुपए मूल्य का धान गायब हो जाना प्रशासनिक लापरवाही या संभावित मिलीभगत की आशंका को मजबूत करता है।
सबसे ज्यादा धान इन केंद्रों से गायब
- आरंगी सहकारी समिति – 4,437 क्विंटल (एफआईआर दर्ज)
- बम्हनी सहकारी समिति – 4,365 क्विंटल (एफआईआर दर्ज)
- तोषगांव सहकारी समिति – 2,760.80 क्विंटल (करीब 85.58 लाख रुपए)
- बढ़ईपाली सहकारी समिति – 2,157.68 क्विंटल (करीब 66.88 लाख रुपए)
- मोंगरापाली सहकारी समिति – 1,952.40 क्विंटल (करीब 60.52 लाख रुपए)
- सम्हर सहकारी समिति – लगभग 56.44 लाख रुपए का धान
- कोटद्वारी सहकारी समिति – 1,780.65 क्विंटल (करीब 55.20 लाख रुपए)
- मल्दामाल सहकारी समिति – 1,713.25 क्विंटल (करीब 53.11 लाख रुपए)
- बेलसोंडा सहकारी समिति – 1,680.41 क्विंटल (करीब 52.09 लाख रुपए)
- खेमड़ा सहकारी समिति – 1,551.60 क्विंटल (करीब 48.09 लाख रुपए)
तोषगांव की रिपोर्ट अब तक लंबित
जानकारी के अनुसार अधिकांश केंद्रों की भौतिक सत्यापन रिपोर्ट एक माह पहले ही कलेक्टर को सौंप दी गई थी। हालांकि तोषगांव केंद्र की रिपोर्ट अभी तक प्रस्तुत नहीं की गई है। इस संबंध में तहसीलदार श्रीधर पंडा का कहना है कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है।
बड़ा सवाल
करीब 18 करोड़ रुपए मूल्य का धान आखिर गया कहां? जब रिकॉर्ड में स्टॉक मौजूद था तो भौतिक सत्यापन में फड़ खाली कैसे मिले? यदि समय रहते सभी जिम्मेदार अधिकारियों और केंद्र प्रभारियों पर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती, तो यह मामला प्रदेश के सबसे बड़े धान खरीदी घोटालों में शामिल हो सकता है।
