पटना। बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अब राज्य की सबसे चर्चित राजनीतिक लड़ाइयों में शामिल हो गया है। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने इस सीट से चुनावी मैदान में उतरकर मुकाबले को हाई-प्रोफाइल बना दिया है। हालांकि उनके सामने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का मजबूत संगठन, वर्षों पुराना जनाधार और नए उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा बड़ी चुनौती बनकर खड़े हैं।
बीजेपी का मजबूत गढ़ रही है बांकीपुर
बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से भाजपा का अभेद्य किला मानी जाती है। पिछले करीब तीन दशकों से इस सीट पर भाजपा का दबदबा कायम है और लगातार नौ चुनावों में पार्टी ने यहां जीत दर्ज की है। हाल ही में नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद उनके विधायक पद से इस्तीफा देने पर यह सीट खाली हुई, जिसके चलते उपचुनाव कराया जा रहा है।
शुरुआत में भाजपा ने अभिषेक कुमार को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन बाद में टिकट बदलकर नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतार दिया।
प्रशांत किशोर के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई
जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर पहली बार किसी बड़े चुनावी मुकाबले में सीधे उम्मीदवार के रूप में उतर रहे हैं। बिहार में वैकल्पिक राजनीति का दावा करने वाली उनकी पार्टी के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। यदि वह भाजपा के सबसे मजबूत गढ़ में चुनौती पेश करने में सफल रहते हैं, तो आगामी विधानसभा चुनाव से पहले उनकी राजनीतिक स्वीकार्यता और मजबूत हो सकती है।
जातीय समीकरण भी होंगे निर्णायक
बांकीपुर सीट पर जातीय समीकरण चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभाते हैं। यहां कायस्थ समुदाय प्रभावशाली माना जाता है। इसके अलावा यादव, मुस्लिम, चंद्रवंशी, वैश्य और अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता भी बड़ी संख्या में हैं। राजनीतिक दल इन सभी सामाजिक वर्गों को साधने की कोशिश कर रहे हैं।
बीजेपी को संगठन का फायदा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की सबसे बड़ी ताकत उसका मजबूत बूथ नेटवर्क और कैडर आधारित संगठन है। मतदान के दिन मतदाताओं को बूथ तक पहुंचाने से लेकर चुनावी प्रबंधन तक भाजपा इस क्षेत्र में लगातार मजबूत रही है। यही कारण है कि नए चेहरे के बावजूद पार्टी खुद को मजबूत स्थिति में मान रही है।
विपक्षी वोटों के बंटवारे का भी असर
इस उपचुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और जन सुराज दोनों के मैदान में होने से विपक्षी मतों के बंटने की संभावना भी जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है, तो इसका सीधा फायदा भाजपा को मिल सकता है।
नतीजों पर पूरे बिहार की नजर
बांकीपुर उपचुनाव सिर्फ एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि इसे बिहार की बदलती राजनीति और आगामी विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल भी माना जा रहा है। इस चुनाव का परिणाम यह तय करेगा कि भाजपा अपना मजबूत गढ़ बचा पाती है या प्रशांत किशोर राज्य की राजनीति में बड़ा राजनीतिक संदेश देने में सफल होते हैं।
