वाशिंगटन / नई दिल्ली:
अमेरिकी प्रशासन ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में जबरन मजदूरी (Forced Labor) के इस्तेमाल को रोकने के नाम पर एक बड़ा कदम उठाया है। ट्रेड एक्ट के सेक्शन 301 के तहत अमेरिका ने 60 देशों से होने वाले आयात पर नया ‘फोर्स्ड लेबर टैरिफ’ लगाने की घोषणा की है। इस नीति के तहत भारत पर 10% अतिरिक्त आयात शुल्क (Tariff) लगाया गया है।
क्या है अमेरिका का नया फोर्स्ड लेबर टैरिफ?
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देशों के अनुसार, यह शुल्क उन देशों के उत्पादों पर लगाया जा रहा है जिनके बारे में अमेरिका का मानना है कि वे अपनी आपूर्ति श्रृंखला में जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर प्रभावी रोक लगाने में असमर्थ रहे हैं।
- दो श्रेणियों में शुल्क: अमेरिका ने देशों को दो वर्गों में बांटा है—जिन देशों ने कड़े नियम अपनाए हैं उन पर 10% टैरिफ लगाया गया है और जिनके नियम पर्याप्त नहीं पाए गए उन पर 12.5% टैरिफ लागू किया गया है।
- भारत को मिली मामूली राहत: शुरुआत में भारत पर 12.5% शुल्क लगाने का प्रस्ताव था। लेकिन जून में भारत द्वारा अपनी विदेश व्यापार नीति (FTP) में संशोधन कर जबरन मजदूरी से बने उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाने का कानूनी ढांचा तैयार करने के बाद अमेरिका ने भारत को 10% वाली श्रेणी में रखा।
भारत पर 10% टैक्स से आपकी जेब और अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है। इस 10% अतिरिक्त शुल्क का असर सीधे तौर पर कई उद्योगों और भारतीय कंपनियों पर देखने को मिल सकता है:
- निर्यातकों और कंपनियों पर असर
भारतीय सामान होंगे महंगे: अमेरिका भेजे जाने वाले भारतीय सामान (जैसे कपड़े, रत्न व आभूषण, चमड़े के उत्पाद, हस्तशिल्प और सीफूड) पर 10% अधिक टैक्स लगेगा। इससे अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद महंगे हो जाएंगे, जिससे उनकी मांग घटने का जोखिम है।
मुनाफे में कटौती: अमेरिकी खरीदारों से प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए भारतीय कंपनियों को अपनी कीमतें घटानी पड़ सकती हैं, जिससे उनके मार्जिन और मुनाफे पर असर पड़ेगा।
- रोजगार और घरेलू बाजार
निर्यात आधारित सेक्टरों पर दबाव: टेक्सटाइल, गारमेंट्स, जेम्स एंड ज्वेलरी और फुटवेयर जैसे लेबर-इंटेन्सिव सेक्टर में निर्यात घटने से नई नौकरियों के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।
सप्लाई चैन में बदलाव: भारतीय कंपनियों को अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम कर यूरोप, मिडिल ईस्ट और एशिया के अन्य बाजारों में निर्यात बढ़ाने की रणनीति अपनानी पड़ सकती है।
- आपकी जेब पर कितना असर?
घरेलू उपभोक्ता: भारत के भीतर बिकने वाले सामानों की कीमतों पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि यह टैक्स अमेरिका में प्रवेश करने वाले भारतीय सामान पर लागू है।
अप्रत्यक्ष असर: हालांकि, अगर भारत के प्रमुख निर्यातक उद्योगों की आय घटती है, तो इसका असर शेयर बाजार में संबंधित कंपनियों के शेयरों, आईटी व मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के कर्मचारियों के बोनस व इंक्रीमेंट पर दिख सकता है।
