लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार किसानों और खेतिहर मजदूरों के मेधावी बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में अधिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना का दायरा बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, ताकि अधिक से अधिक पात्र विद्यार्थियों को इस योजना का लाभ मिल सके।मुख्यमंत्री ने यह निर्देश उत्तर प्रदेश राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद के संचालक मंडल की 172वीं बैठक में दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि योजना का विस्तार करते हुए ऐसी कार्ययोजना तैयार की जाए, जिससे ज्यादा से ज्यादा किसान परिवारों के बच्चों तक छात्रवृत्ति की सुविधा पहुंचे।
बैठक में मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना सहायता योजना तथा मुख्यमंत्री खेत-खलिहान अग्निकांड दुर्घटना सहायता योजना की अवधि 1 जुलाई 2025 से 30 जून 2030 तक बढ़ाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 3025.49 करोड़ रुपये के बजट को स्वीकृति प्रदान की गई, जिसमें किसान कल्याण, कृषि विपणन और मंडी व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की मंडियों के आधुनिकीकरण पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि मंडियों में पेयजल, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाया जाए, ताकि किसानों को आधुनिक और सुविधाजनक विपणन व्यवस्था मिल सके।
इसके अलावा मुख्यमंत्री ने मंडी परिसरों में पीपीपी मॉडल के तहत कृषि उपज प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि इससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा, कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।बैठक में अधिक से अधिक मंडियों को ई-नाम (राष्ट्रीय कृषि बाजार) प्लेटफॉर्म से जोड़ने, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन को गति देने तथा प्रत्येक जिले में जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में मंडी स्थलों के निर्माण एवं विस्तार, संपर्क मार्गों की मरम्मत, ग्रामीण हाट, किसान बाजार, गोवंशी आश्रय स्थल, छात्रावास निर्माण तथा मंडी समितियों के लिए भूमि खरीद जैसे विकास कार्यों के लिए पर्याप्त धनराशि का प्रावधान किया गया है। पहले से स्वीकृत निर्माण कार्यों के लिए 1212.02 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।
इसके साथ ही मूल्य समर्थन योजना के तहत दलहन एवं तिलहन की खरीद को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न सहकारी संस्थाओं को ब्याजमुक्त कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई।सरकार का मानना है कि इन फैसलों से किसानों की आय बढ़ाने, कृषि विपणन व्यवस्था को मजबूत करने और किसान परिवारों के बच्चों को शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।
