नई दिल्ली: बांग्लादेश की नई सरकार द्वारा तीस्ता नदी विकास परियोजना में चीन की भागीदारी को मंजूरी दिए जाने के बाद भारत की रणनीतिक और सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। यह परियोजना बांग्लादेश के उत्तरी हिस्से में स्थित है और भारत के संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के बेहद करीब होने के कारण इसे सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत ने पहले इस परियोजना के लिए वित्तीय सहयोग की इच्छा जताई थी, लेकिन बांग्लादेश में राजनीतिक बदलाव के बाद परियोजना को लेकर रुख बदल गया और अब चीन को इसमें प्रमुख भूमिका मिल गई है। भारत इस घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है।
क्या है तीस्ता नदी परियोजना?
बांग्लादेश और चीन के बीच हुए समझौते के तहत तीस्ता नदी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा। प्रस्तावित कार्यों में शामिल हैं—
- 224 किलोमीटर सड़क नेटवर्क का विस्तार
- 171 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का पुनर्विकास
- 82 जेटी का निर्माण
- तीस्ता नदी से लगभग 140 मिलियन क्यूबिक मीटर गाद की सफाई
- आधुनिक सिंचाई नेटवर्क का निर्माण
- नए शहरी केंद्रों का विकास
- विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) की स्थापना
इस परियोजना का निर्माण चीन की सरकारी कंपनी पावरचाइना (PowerChina) द्वारा किए जाने की योजना है।
क्यों महत्वपूर्ण है सिलीगुड़ी कॉरिडोर?
सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे आम बोलचाल में “चिकन नेक” कहा जाता है, भारत के मुख्य भूभाग को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाली एक संकरी भूमि पट्टी है। यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य लॉजिस्टिक्स के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है।
बताया जा रहा है कि तीस्ता परियोजना का कुछ हिस्सा भारत-बांग्लादेश सीमा से लगभग 10–12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसी वजह से भारत इस परियोजना पर विशेष नजर रखे हुए है।
भारत की प्रतिक्रिया
भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत ने अपनी सुरक्षा संबंधी चिंताओं से बांग्लादेश को अवगत करा दिया है और क्षेत्र में होने वाली सभी गतिविधियों पर करीबी निगरानी रखी जाएगी। साथ ही, तीस्ता जल बंटवारे से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त नदी आयोग के माध्यम से बातचीत जारी रखने की बात भी कही गई है।
रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते क्षेत्रीय समीकरणों को देखते हुए भारत को भी सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी परियोजनाओं की गति तेज करनी चाहिए।
बांग्लादेश का पक्ष
बांग्लादेश सरकार का कहना है कि तीस्ता परियोजना पूरी तरह उसके विकास और बाढ़ नियंत्रण से जुड़ी योजना है। अधिकारियों के अनुसार, एक संप्रभु राष्ट्र होने के नाते बांग्लादेश अपने विकास संबंधी निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है। उनका कहना है कि यदि किसी देश को सुरक्षा संबंधी कोई चिंता है तो उस पर चर्चा की जा सकती है, लेकिन परियोजना का उद्देश्य केवल क्षेत्रीय विकास है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण एशिया में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत, बांग्लादेश और चीन के संबंधों पर इस परियोजना का असर पड़ सकता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विकास, कूटनीति और सुरक्षा के बीच संतुलन किस प्रकार बनाया जाता है।
