नई दिल्ली/बेंगलुरु विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस के भीतर अलग-अलग राजनीतिक संदेश सामने आते दिखाई दे रहे हैं। एक ओर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी दल इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने राज्य के लोगों से SIR प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने और समय पर फॉर्म भरने की अपील की है। इसी वजह से अब राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या कांग्रेस के भीतर इस मुद्दे पर अलग-अलग सोच उभर रही है।
कर्नाटक में SIR प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने स्वयं अपनी पत्नी उषा शिवकुमार के साथ SIR फॉर्म भरकर लोगों के सामने उदाहरण पेश किया। उन्होंने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है और प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह समय पर अपनी मतदाता संबंधी जानकारी अपडेट कराए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर फॉर्म उपलब्ध करा रहे हैं और जो लोग ऑनलाइन प्रक्रिया नहीं कर सकते, वे ऑफलाइन माध्यम से भी आवेदन जमा कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने लोगों को आगाह करते हुए कहा कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर आवश्यक दस्तावेजों के साथ SIR फॉर्म जमा नहीं किया गया, तो मतदाता सूची से नाम हटने जैसी स्थिति बन सकती है। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे इस प्रक्रिया को गंभीरता से लें और अपने मतदान के अधिकार की रक्षा करें।
हालांकि डीके शिवकुमार का यह रुख कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व की रणनीति से अलग माना जा रहा है। राहुल गांधी लगातार SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं और उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल मतदाता सूची से पात्र मतदाताओं के नाम हटाने के लिए किया जा सकता है। इसी मुद्दे पर कांग्रेस समेत 23 विपक्षी दलों ने न्यायपालिका से भी हस्तक्षेप की मांग की है और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर चिंता जताई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डीके शिवकुमार का बयान प्रशासनिक जिम्मेदारी के नजरिए से देखा जा सकता है। एक मुख्यमंत्री होने के नाते उनकी प्राथमिकता राज्य में चुनाव आयोग की प्रक्रिया को सुचारु रूप से लागू कराना और मतदाताओं को जागरूक करना है, जबकि कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी पारदर्शिता से जोड़कर उठा रहा है। यही कारण है कि दोनों नेताओं के संदेशों में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है।
फिलहाल कांग्रेस की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है कि पार्टी का अंतिम और एकीकृत रुख क्या होगा। लेकिन डीके शिवकुमार की अपील ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि SIR को लेकर पार्टी के भीतर राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण अलग-अलग दिखाई दे रहे हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस नेतृत्व इस मुद्दे पर एक साझा रणनीति अपनाता है या फिर राज्यों को अपने-अपने स्तर पर अलग रुख रखने की छूट देता है। SIR का मुद्दा आने वाले चुनावों से पहले राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा विषय बनता नजर आ रहा है।
