नई दिल्ली: लोकसभा में एंटी पेपर लीक (संशोधन) बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर नहीं होने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह विधेयक केवल दिखावे का प्रयास है। गोगोई ने नीट पेपर लीक, छात्र आंदोलन और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका को लेकर सरकार से कई सवाल पूछे।
’21 छात्रों ने आत्महत्या की, फिर भी शिक्षा मंत्री का सम्मान किया’
गौरव गोगोई ने कहा कि नीट पेपर लीक के कारण 21 छात्रों ने आत्महत्या की, लेकिन इसके बावजूद तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का सम्मान किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब लाखों छात्र प्रभावित हुए, तब जवाबदेही तय करने के बजाय मंत्री का सार्वजनिक सम्मान क्यों किया गया।
‘2024 में कानून बना, फिर 2026 में पेपर लीक कैसे हुआ?’
कांग्रेस सांसद ने कहा कि सरकार 2024 में एंटी पेपर लीक कानून लेकर आई थी, लेकिन इसके बावजूद 2026 में फिर पेपर लीक की घटना हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पेपर लीक से इनकार किया था और इस बार भी लंबे समय तक सरकार अपनी बात पर अड़ी रही।
‘यह सरकार की विफलता का प्रमाण’
गोगोई ने कहा कि सरकार दावा कर रही है कि कानून से सुधार हुआ है, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत है। उनके अनुसार, यदि कानून प्रभावी होता तो दोबारा पेपर लीक की नौबत नहीं आती। उन्होंने कहा कि यह संशोधन सरकार की नाकामी को छिपाने की कोशिश है।
जंतर-मंतर आंदोलन का किया जिक्र
लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान गोगोई ने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि छात्रों ने देश को याद दिलाया कि लोकतंत्र में सवाल पूछना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान छात्रों और सामाजिक संगठनों के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि इस आंदोलन में लोकतंत्र और इंसानियत दोनों की झलक देखने को मिली।
पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर पेलेट गन, लाठीचार्ज और महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार जैसी घटनाएं सामने आईं। उन्होंने गृह मंत्री से पूछा कि बल प्रयोग के आदेश किसने दिए और इसकी जवाबदेही कौन तय करेगा।
’44 आरोपियों को मिल चुकी है जमानत’
गोगोई ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि 2024 के पेपर लीक मामले में 45 आरोपियों की पहचान हुई थी, लेकिन 44 आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि कथित मास्टरमाइंड लंबे समय तक फरार रहा और गिरफ्तारी के बाद उसे भी जमानत मिल गई।
‘सिर्फ सजा बढ़ाने से शिक्षा व्यवस्था नहीं सुधरेगी’
कांग्रेस सांसद ने कहा कि केवल दंड और जुर्माने बढ़ाने से शिक्षा प्रणाली में सुधार नहीं होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा सुधार की बजाय राजनीतिक लाभ पर अधिक ध्यान दे रही है। उनके अनुसार, छात्रों की चिंताओं को समझना और परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाना ही स्थायी समाधान है।
‘छात्रों का संघर्ष लोकतंत्र की ताकत है’
अपने भाषण के अंत में गौरव गोगोई ने कहा कि भूख हड़ताल करना, पुलिस की लाठियां खाना और अपने भविष्य के लिए सड़क पर उतरना आसान नहीं होता। उन्होंने कहा कि छात्रों का यह आंदोलन लोकतंत्र की ताकत और युवाओं के साहस का प्रतीक है तथा सरकार को उनकी आवाज सुननी चाहिए।
