इंदौर। मध्य प्रदेश कांग्रेस में आंतरिक विवाद एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। पार्टी ने पूर्व प्रदेश महासचिव एवं प्रवक्ता राकेश सिंह यादव को प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया है। पार्टी नेतृत्व का आरोप है कि यादव लगातार संगठन विरोधी गतिविधियों में शामिल थे और पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रहे थे। वहीं निष्कासन के बाद राकेश सिंह यादव ने कांग्रेस नेतृत्व पर तीखे आरोप लगाते हुए बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।
इंदौर शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष चिंटू चौकसे द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि राकेश सिंह यादव बार-बार पार्टी और उसके पदाधिकारियों के खिलाफ कथित रूप से भ्रामक जानकारी प्रसारित कर रहे थे। उन पर सोशल मीडिया के माध्यम से नकारात्मक प्रचार करने और अनुशासनहीनता के आरोप भी लगाए गए हैं। पार्टी का कहना है कि कई बार समझाइश देने के बावजूद उनके व्यवहार में सुधार नहीं आया, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई।
निष्कासन के बाद राकेश सिंह यादव ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए उन्हें “धृतराष्ट्र” की संज्ञा दी। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में ऐसे हालात बन गए हैं जहां नेतृत्व की कमजोरी के कारण कई “दुर्योधन” पैदा हो गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पर भी गंभीर आरोप लगाए और दावा किया कि संगठन में पदों को लेकर लेन-देन और सौदेबाजी हुई है।
यादव ने कुछ अन्य नेताओं का नाम लेते हुए भी कई आरोप लगाए। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई सार्वजनिक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया। कांग्रेस की ओर से भी इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राकेश सिंह यादव लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े रहे हैं और प्रदेश महासचिव व प्रवक्ता जैसी जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। हाल के दिनों में वह लगातार पार्टी की कार्यप्रणाली और नेतृत्व पर सवाल उठाते रहे थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम मध्य प्रदेश कांग्रेस के भीतर चल रहे संगठनात्मक असंतोष को उजागर करता है।
फिलहाल, कांग्रेस नेतृत्व ने अनुशासन बनाए रखने की बात दोहराई है, जबकि राकेश सिंह यादव के आरोपों ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में पार्टी इस पूरे घटनाक्रम पर क्या रुख अपनाती है, इस पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।
