मुजफ्फराबाद। पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में प्रदर्शनों और असहमति से निपटने के प्रशासन के तरीके को लेकर जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) ने चिंता जताई है। समिति ने पाकिस्तान सरकार पर आरोप लगाया है कि क्षेत्र में विरोध प्रदर्शनों को जिस तरह से संभाला जा रहा है, उससे तनाव और बढ़ सकता है। समिति ने PoJK की स्थिति की तुलना बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में जारी सुरक्षा चुनौतियों से भी की है।
JKJAAC की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कासिर खान के नाम से किए गए एक पोस्ट में सवाल उठाया गया कि क्या सरकार की नीतियां और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई लोगों को उग्रवाद की ओर धकेल सकती है। समिति ने बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षा बलों पर होने वाले हमलों का भी उल्लेख किया और कहा कि इन क्षेत्रों में प्रशासन के सामने भी सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बनी हुई हैं।
समिति ने पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी, सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार और राज्य मंत्री तलाल चौधरी की भूमिका पर भी सवाल उठाए। JKJAAC का आरोप है कि सरकार की ओर से दिए गए बयान और उठाए गए कदम क्षेत्र में हिंसक घटनाओं को रोकने में प्रभावी साबित नहीं हुए हैं। समिति ने बलूचिस्तान में महिला आत्मघाती हमलावरों के सामने आने संबंधी रिपोर्टों का भी हवाला दिया है।
JKJAAC ने PoJK के मुख्य सचिव और पुलिस महानिरीक्षक पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित तौर पर अत्यधिक बल प्रयोग करने का आरोप लगाया है। समिति ने मनमानी हिरासत, छापेमारी और नागरिकों तथा पत्रकारों के खिलाफ कथित दबाव की कार्रवाई का भी दावा किया है। हालांकि, ये आरोप JKJAAC की ओर से लगाए गए हैं और रिपोर्ट में प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर तत्काल प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं है।
PoJK में पिछले कुछ महीनों से प्रदर्शनों और प्रशासन के बीच तनाव बना हुआ है। विरोध प्रदर्शनों के केंद्र में शासन व्यवस्था, कानून-व्यवस्था और स्थानीय लोगों की विभिन्न मांगों से जुड़े मुद्दे रहे हैं। JKJAAC और प्रशासन की ओर से घटनाक्रम और कार्रवाई को लेकर अलग-अलग दावे किए जाते रहे हैं। ऐसे में क्षेत्र की स्थिति को लेकर दोनों पक्षों के बयानों में अंतर बना हुआ है।
