कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर चुनावी नतीजों को लेकर कानूनी जंग तेज हो गई है। मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख Mamata Banerjee ने भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र के चुनाव परिणाम को चुनौती देते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अपनी याचिका में उन्होंने निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े सभी रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग की है।याचिका में ममता बनर्जी ने अदालत से अनुरोध किया है कि भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र के मतदान से संबंधित सभी दस्तावेज, रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, विशेष रूप से ईवीएम, को तत्काल सुरक्षित और सील किया जाए। उनका तर्क है कि इन साक्ष्यों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या उनके नष्ट होने की संभावना को रोकना आवश्यक है, ताकि भविष्य में न्यायिक जांच निष्पक्ष रूप से हो सके।
- चुनावी विवाद और अदालत का रास्ता
ममता बनर्जी और चुनावी मुकदमेबाजी का संबंध नया नहीं है। वर्ष 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट पर भाजपा नेता Suvendu Adhikari से मिली करीबी हार के बाद भी उन्होंने चुनाव परिणाम को स्वीकार नहीं किया था। उस समय उन्होंने मतगणना में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर की थी और पुनर्मतगणना की मांग की थी।नंदीग्राम मामले की सुनवाई के दौरान शुरुआती चरण में अदालत ने याचिका पर कड़ी टिप्पणी करते हुए ममता बनर्जी पर ₹5 लाख का जुर्माना भी लगाया था। बाद में यह मामला दूसरी पीठ को स्थानांतरित कर दिया गया और इसकी सुनवाई अब भी जारी है।
- इतिहास दोहराने की चर्चा
राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि 2021 की तरह एक बार फिर चुनावी हार के बाद मामला अदालत पहुंच गया है। हालिया विधानसभा चुनाव में भवानीपुर सीट पर शुभेंदु अधिकारी की जीत के बाद ममता बनर्जी ने परिणामों पर सवाल उठाते हुए नई याचिका दाखिल की है। यदि अदालत इस मामले पर सुनवाई स्वीकार करती है, तो हाईकोर्ट में ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी से जुड़े दो अलग-अलग चुनावी विवाद समानांतर रूप से विचाराधीन रह सकते हैं।अब सबकी निगाहें कलकत्ता हाईकोर्ट पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि भवानीपुर चुनाव परिणाम को लेकर उठाए गए सवालों पर आगे क्या कानूनी कार्रवाई होती है और क्या चुनावी रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की मांग पर अदालत कोई विशेष आदेश जारी करती है।
