नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के बीच शुरू हुआ ‘टिन्नू-टीपू’ विवाद अब कानूनी लड़ाई की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। अखिलेश यादव की ओर से भेजे गए मानहानि नोटिस के बाद निशिकांत दुबे ने पलटवार करते हुए तीन सवाल उठाए हैं।
निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि उन्होंने अखिलेश यादव और उनके वकील को कानूनी जवाब भेज दिया है। उन्होंने सवाल किया कि जिस व्यक्ति का नाम विवाद में आया है, उसके संबंध में मानहानि किस आधार पर हुई है। साथ ही उन्होंने पूछा कि किस सरकारी दस्तावेज में अखिलेश यादव का नाम ‘टीपू’ दर्ज है।
- निशिकांत दुबे ने लगाए मानसिक प्रताड़ना के आरोप
भाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि उन्हें और उनके परिवार को बेवजह मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस मामले में होने वाले कानूनी खर्च की भरपाई के लिए वह हर्जाने की मांग करेंगे।
उन्होंने अपने पोस्ट में तीन सवाल रखे—
- संबंधित व्यक्ति की मानहानि किस आधार पर हुई?
- किस सरकारी दस्तावेज में अखिलेश यादव का नाम ‘टीपू’ दर्ज है?
- उन्हें कथित रूप से मानसिक प्रताड़ित करने के लिए कानूनी कार्रवाई क्यों न की जाए?
- कैसे शुरू हुआ ‘टिन्नू-टीपू’ विवाद?
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब निशिकांत दुबे ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट साझा की। इस पोस्ट में दावा किया गया था कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के आरोपी ‘टिन्नू यादव’ और अखिलेश यादव के बीच लगातार बातचीत होती थी।
निशिकांत दुबे ने इसी पोस्ट को साझा करते हुए तंज कसा था— “टिन्नू टीपू से ही तो बात कर रहा था?” इसके बाद समाजवादी पार्टी और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई।
- अखिलेश यादव की ओर से भेजा गया नोटिस
अखिलेश यादव ने इस पोस्ट पर आपत्ति जताते हुए इसे अपमानजनक बताया था। उन्होंने पोस्ट हटाने की मांग करते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। इसके बाद समाजवादी पार्टी की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई और निशिकांत दुबे को मानहानि का नोटिस भेजा गया।
- राजनीतिक विवाद ने पकड़ा तूल
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले से जुड़ा यह विवाद अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल गया है। दोनों नेताओं के बीच सोशल मीडिया पर जारी बयानबाजी के बाद मामला कानूनी प्रक्रिया तक पहुंच चुका है।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि मानहानि नोटिस और कानूनी जवाब के बाद यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।
