नई दिल्ली |देश की राजनीति में बुधवार को उस समय हलचल और तेज हो गई, जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नई दिल्ली में मुलाकात की। इस दौरान उनकी बेटी और बारामती से सांसद सुप्रिया सुले भी उनके साथ मौजूद रहीं। संसद के मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी तीखी राजनीतिक खींचतान के बीच हुई इस मुलाकात ने कई नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।
प्रधानमंत्री कार्यालय से सामने आई तस्वीरों में पीएम मोदी शरद पवार का गर्मजोशी से स्वागत करते दिखाई दिए। एक तस्वीर में प्रधानमंत्री किसी दस्तावेज़ को देखते नजर आ रहे हैं, जबकि शरद पवार उनसे चर्चा करते दिख रहे हैं। मुलाकात का माहौल सौहार्दपूर्ण बताया जा रहा है, हालांकि बैठक में किन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब केंद्र सरकार संसद में कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए विपक्षी दलों से लगातार संवाद कर रही है। महिला आरक्षण, परिसीमन और अन्य अहम विधायी मुद्दों पर सरकार विभिन्न दलों का सहयोग जुटाने की कोशिश में है। ऐसे में शरद पवार और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात को राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पिछले कुछ सप्ताह से यह चर्चा भी तेज है कि शरद पवार का गुट संसद में कुछ अहम विधेयकों पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का समर्थन कर सकता है। यही वजह है कि इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, न तो शरद पवार और न ही केंद्र सरकार की ओर से इन अटकलों की कोई आधिकारिक पुष्टि की गई है।
गौरतलब है कि इससे पहले शरद पवार ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से भी मुलाकात की थी। उस बैठक को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हुई थीं। हालांकि, शिवसेना नेताओं ने उस समय स्पष्ट किया था कि वरिष्ठ नेताओं के बीच शिष्टाचार मुलाकात को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।
फिलहाल प्रधानमंत्री मोदी और शरद पवार की यह मुलाकात राजनीतिक विश्लेषकों और विपक्षी दलों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है। आने वाले दिनों में यदि इस मुलाकात के बाद कोई राजनीतिक संकेत या निर्णय सामने आता है, तो उसका असर महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें दोनों नेताओं की अगली राजनीतिक रणनीति पर टिकी हुई हैं।
