अहिल्यानगर। महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में जारी छात्रों के आंदोलन को अब देश के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे का खुला समर्थन मिल गया है। अन्ना हजारे ने आंदोलन में शामिल होने का फैसला किया है। उनके इस ऐलान से आंदोलन को नई ऊर्जा और नैतिक मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
अन्ना हजारे ने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी आंदोलन का जवाब हिंसा या बल प्रयोग से नहीं दिया जाना चाहिए। उनका कहना था कि सरकार को छात्रों से बातचीत कर उनकी समस्याओं का शांतिपूर्ण समाधान निकालना चाहिए।
हाल ही में छात्रों के सांसद मार्च के दौरान हुई कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए अन्ना हजारे ने कहा, “हिंसा कभी किसी समस्या का समाधान नहीं होती। मैंने अपने जीवन में 22 आंदोलन किए, लेकिन हर बार सत्य और अहिंसा के रास्ते पर चलकर ही सफलता हासिल की।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेते हुए अन्ना हजारे ने कहा कि वे देश के सम्मानित नेता हैं और उन्हें इस पूरे मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जनता की बात सुनना और समस्याओं का समाधान करना है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर पूछे गए सवाल के जवाब में अन्ना हजारे ने कहा कि “जनता ही लोकतंत्र की असली मालिक है। सरकार और अधिकारी जनता के सेवक हैं। यदि कहीं गलती हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए।”
इस दौरान अन्ना हजारे ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अनशन स्थल से हटाए जाने की घटना पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलनकारी के साथ संवाद के बजाय बल प्रयोग करना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।
अन्ना हजारे के आंदोलन में शामिल होने की घोषणा के बाद छात्रों में उत्साह का माहौल है। माना जा रहा है कि उनके जुड़ने से आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक समर्थन मिल सकता है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार छात्रों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और आगे क्या फैसला लेती है।
