नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी को नेता प्रतिपक्ष के पद से हटाने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने की बात कही है। साथ ही उन्होंने राहुल गांधी की विदेश यात्राओं की एसआईटी जांच की भी मांग की है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या संसद में केवल प्रस्ताव लाकर नेता प्रतिपक्ष को हटाया जा सकता है? आइए जानते हैं इस पद से जुड़े संवैधानिक और कानूनी प्रावधान।
कैसे मिलता है नेता प्रतिपक्ष का पद?
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद संविधान में नहीं, बल्कि Salary and Allowances of Leaders of Opposition in Parliament Act, 1977 के तहत मान्यता प्राप्त है। इस कानून के अनुसार, लोकसभा में सरकार के खिलाफ सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को, लोकसभा अध्यक्ष की औपचारिक मान्यता मिलने के बाद नेता प्रतिपक्ष का दर्जा दिया जाता है।
क्या सरकार प्रस्ताव लाकर राहुल गांधी को हटा सकती है?
कानूनी रूप से इसका जवाब ‘नहीं’ है। मौजूदा कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि सरकार या कोई सांसद संसद में प्रस्ताव लाकर नेता प्रतिपक्ष को पद से हटा सके। यह पद किसी मतदान या अविश्वास प्रस्ताव से नहीं, बल्कि सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता होने के आधार पर मिलता है।
राहुल गांधी तभी नेता प्रतिपक्ष का पद खो सकते हैं, यदि:
- कांग्रेस पार्टी किसी अन्य सांसद को अपना नेता चुन ले,
- राहुल गांधी लोकसभा की सदस्यता खो दें,
- या किसी कानूनी अथवा संवैधानिक कारण से उनकी सदस्यता समाप्त हो जाए।
स्पीकर की क्या होती है भूमिका?
1977 के कानून के अनुसार नेता प्रतिपक्ष को मान्यता देने का अधिकार लोकसभा अध्यक्ष के पास होता है। हालांकि संसदीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सबसे बड़े विपक्षी दल ने अपने नेता का नाम भेज दिया है, तो स्पीकर उसे मनमाने तरीके से अस्वीकार नहीं कर सकते।
10 प्रतिशत सांसदों का नियम क्या है?
लंबे समय से यह धारणा रही है कि नेता प्रतिपक्ष बनने के लिए किसी दल के पास लोकसभा की कुल सदस्य संख्या का कम से कम 10 प्रतिशत होना चाहिए। हालांकि इस विषय पर संसदीय विशेषज्ञों की अलग-अलग राय है। 2014 और 2019 में कांग्रेस के पास 10 प्रतिशत से कम सांसद होने के कारण उसे नेता प्रतिपक्ष का दर्जा नहीं मिला था, लेकिन कई विशेषज्ञों का कहना है कि यह नियम संसदीय मान्यता से जुड़ा है, न कि नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति से।
नेता प्रतिपक्ष की क्यों है अहम भूमिका?
नेता प्रतिपक्ष केवल विपक्ष का नेता नहीं होता, बल्कि वह कई महत्वपूर्ण चयन समितियों का सदस्य भी होता है। इनमें सीबीआई निदेशक, केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (CVC), लोकपाल, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) समेत कई संवैधानिक संस्थाओं के प्रमुखों की नियुक्ति से जुड़ी समितियां शामिल हैं। इसलिए यह पद लोकतांत्रिक व्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
निशिकांत दुबे ने क्या कहा?
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी विदेशी ताकतों के प्रभाव में काम कर रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2004 से 2026 तक राहुल गांधी की विदेश यात्राओं, मुलाकातों और कथित समझौतों की एसआईटी जांच कराने की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि वह राहुल गांधी को नेता प्रतिपक्ष पद से हटाने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने की कोशिश करेंगे।वहीं, कांग्रेस ने भाजपा के इन आरोपों को पहले भी राजनीतिक और निराधार बताते हुए खारिज किया है।
