इस्लामाबाद। मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक कच्चे तेल बाजार में जारी उतार-चढ़ाव का असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर लगातार दिखाई दे रहा है। शहबाज शरीफ सरकार ने एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। नई दरें बुधवार से पूरे देश में लागू हो गई हैं।
सरकार के फैसले के बाद पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में प्रति लीटर वृद्धि की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी और आयात लागत बढ़ने को इसका प्रमुख कारण बताया जा रहा है। इससे पहले अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में कुछ समय के लिए कमी आने पर तेल की कीमतों में राहत मिली थी, लेकिन क्षेत्र में फिर बढ़े तनाव ने तेल बाजार को प्रभावित कर दिया है।
पाकिस्तान सरकार पहले से ही ईंधन पर भारी कर वसूल रही है। रिपोर्टों के अनुसार, पेट्रोल पर लगभग 110 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 96 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर विभिन्न करों एवं शुल्कों के रूप में वसूले जा रहे हैं। ऐसे में नई मूल्य वृद्धि से आम उपभोक्ताओं और परिवहन क्षेत्र पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है। परिवहन खर्च बढ़ने से खाद्य पदार्थों, दैनिक उपयोग की वस्तुओं और अन्य आवश्यक सेवाओं की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है। ऐसे समय में, जब पाकिस्तान पहले से आर्थिक चुनौतियों और महंगाई से जूझ रहा है, ईंधन की बढ़ी कीमतें आम जनता के लिए नई परेशानी बन सकती हैं।
गौरतलब है कि वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता के कारण ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों पर दबाव बढ़ रहा है। पाकिस्तान भी उन्हीं देशों में शामिल है, जहां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर घरेलू ईंधन कीमतों पर देखने को मिलता है।
