नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ कथित बर्बरता की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में गठित एक स्वतंत्र उच्चाधिकार प्राप्त समिति (हाई पावर कमिटी) से कराई जानी चाहिए।
राहुल गांधी ने गुरुवार को सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर प्रदर्शन से जुड़ा एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि छात्र न्याय के हकदार हैं। उन्होंने लिखा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के साथ हुई कथित हिंसा की निष्पक्ष जांच आवश्यक है और इसके लिए सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।
इससे पहले लोकसभा में एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा के दौरान भी राहुल गांधी ने यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में छात्रों के साथ हुई कथित मारपीट के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जिम्मेदार हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। राहुल गांधी ने दोहराया कि पूरे मामले की जांच हाई पावर कमिटी से कराई जानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें लोकसभा में अपनी बात पूरी तरह रखने का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष के सदस्यों को बोलने की अनुमति मिली, लेकिन विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी भी स्थिति में अपने बयान के लिए माफी नहीं मांगेंगे और विपक्ष के नेता के रूप में जनता के मुद्दे उठाना उनका संवैधानिक अधिकार है।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग किया गया और उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया तथा उन्हें भविष्य में आंदोलन से रोकने के लिए भय का माहौल बनाया गया।
वहीं, राहुल गांधी के आरोपों का सरकार की ओर से कड़ा विरोध किया गया। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी ने सदन में तथ्यहीन आरोप लगाए हैं, जो संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने राहुल गांधी से अपने बयान के लिए माफी मांगने की मांग भी की।
छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच अब इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। विपक्ष निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़ा है, जबकि सरकार आरोपों को निराधार बताते हुए उन्हें खारिज कर रही है।
