पटना: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी एवं महिला विकास मंच की नेता वीणा मानवी का नामांकन रद्द होने के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। नामांकन खारिज होने के बाद वीणा मानवी ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए प्रशासन और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उनके साथ जानबूझकर अन्याय किया गया और अब वह इस पूरे मामले को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगी।
वीणा मानवी ने दावा किया कि नामांकन प्रक्रिया के दौरान उन्हें कई तरह की प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, पहले नामांकन की तारीख को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रही और बाद में फॉर्म में मौजूद कमियों की पूरी जानकारी समय रहते नहीं दी गई। उनका आरोप है कि यदि अधिकारियों ने सभी त्रुटियों की जानकारी समय पर दे दी होती, तो उन्हें दूर किया जा सकता था उन्होंने आरोप लगाया कि नामांकन दाखिल करने के तुरंत बाद उन्हें एक पुराने जमानती मामले में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, जिसके कारण वह नामांकन से जुड़ी औपचारिकताओं को पूरा नहीं कर सकीं। वीणा मानवी का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई उन्हें चुनावी मैदान से बाहर करने की साजिश का हिस्सा थी।
बीजेपी उम्मीदवार नितिन नवीन पर निशाना साधते हुए वीणा मानवी ने उनके नामांकन पत्रों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके मामले में नियमों की अनदेखी की गई, जबकि उनके नामांकन को तकनीकी आधार पर रद्द कर दिया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और चुनाव आयोग या बीजेपी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
वीणा मानवी ने कहा कि वह चुनाव प्रक्रिया और अपने नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर करेंगी। उनका दावा है कि कानून के अनुसार उन्हें राहत मिलनी चाहिए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वह इस लड़ाई को अंत तक लड़ेंगी।जनता से अपील करते हुए वीणा मानवी ने कहा कि लोकतंत्र में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सबसे महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने मतदाताओं से सोच-समझकर मतदान करने की अपील की और कहा कि वह चुनाव मैदान से बाहर होने के बावजूद लोकतांत्रिक तरीके से अपनी लड़ाई जारी रखेंगी।
बांकीपुर उपचुनाव में वीणा मानवी का नामांकन रद्द होने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि इस मामले में हाईकोर्ट का क्या रुख रहता है और इसका उपचुनाव की प्रक्रिया पर क्या असर पड़ता है।
