बदायूं/लखनऊ:
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UP-TET) के दिन बदायूं में एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश उपाध्यक्ष दुर्विजय सिंह शाक्य के स्वागत में निकाली गई रैली और भारी काफिले के कारण सड़कों पर किलोमीटर लंबा भीषण जाम लग गया। इस जाम का सबसे बुरा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ा जो अपनी परीक्षा देने केंद्र की तरफ बढ़ रहे थे। जाम में फंसने की वजह से दर्जनों उम्मीदवारों की परीक्षा छूट गई, जिसके बाद समाजवादी पार्टी (सपा) के स्थानीय सांसद और विपक्ष ने सरकार पर तीखे आरोप लगाए हैं।
1. परीक्षा के दिन ‘वीआईपी मूवमेंट’ से चरमराई यातायात व्यवस्था
रिपोर्ट के मुताबिक, जिस दिन UPTET परीक्षा आयोजित की जा रही थी, उसी दिन बरेली-बदायूं मार्ग पर भाजपा नेता के स्वागत के लिए भारी संख्या में वाहनों का काफिला निकला।
- अभ्यर्थियों का फूटा गुस्सा: परीक्षा से वंचित रही अभ्यर्थी नेहा गुप्ता और मीनाक्षी भट्ट ने आरोप लगाया कि नेताओं के वीआईपी दौरों को प्राथमिकता देने की वजह से पूरी यातायात व्यवस्था ध्वस्त हो गई। छात्रों का कहना है कि नेताओं के स्वागत के चक्कर में युवाओं के भविष्य को दांव पर लगा दिया गया।
- प्रशासनिक आंकड़े: प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक, पहली पाली में 5639 में से 4875 अभ्यर्थी उपस्थित रहे, लेकिन दूसरी पाली में अनुपस्थित रहने वाले अभ्यर्थियों की संख्या अचानक बढ़ गई, जो सीधे तौर पर इस जाम के असर की ओर इशारा करती है।
2. प्रशासन और पुलिस ने क्या दी सफाई?
इस मामले पर विवाद बढ़ता देख जिले के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है:
- जिलाधिकारी का बयान: जिलाधिकारी अविनाश कुमार राय ने माना कि रूट डायवर्जन के नियमों के बावजूद भाजपा नेता के काफिले और अचानक हुई बारिश के कारण कुछ अभ्यर्थी समय पर परीक्षा केंद्रों तक नहीं पहुंच पाए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में शासन (सरकार) से पत्राचार किया जाएगा।
- एसएसपी ने गिनाईं अन्य वजहें: एसएसपी अंकिता शर्मा ने बताया कि जाम लगने की वजह सिर्फ नेताओं का काफिला नहीं था। शहर में पिछले कई दिनों से एक ओवरब्रिज की मरम्मत का काम चल रहा है जिसके चलते पहले से यातायात प्रभावित था। परीक्षा के दिन हुई बारिश और काफिले के एक साथ मिल जाने से स्थिति और बिगड़ गई।
3. सपा सांसद ने लगाए गंभीर आरोप
इस पूरे मामले को लेकर समाजवादी पार्टी के सांसद ने सत्ता पक्ष और स्थानीय प्रशासन पर जमकर निशाना साधा है। विपक्ष का आरोप है कि प्रशासन ने आम जनता और अभ्यर्थियों की सहूलियत को नजरअंदाज करते हुए केवल सत्ताधारी दल के नेताओं को तरजीह दी, जिसके कारण सैकड़ों युवाओं की महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया।
