हैदराबाद: तेलंगाना के मुख्यमंत्री A. Revanth Reddy ने तुंगभद्रा जल बंटवारे के मुद्दे पर केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि तेलंगाना को तुंगभद्रा परियोजना से उसका वैध और न्यायसंगत जल हिस्सा मिलना चाहिए तथा इस मामले में संबंधित राज्यों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए केंद्र को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक के दौरान कहा कि तुंगभद्रा नदी का पानी राज्य के हजारों किसानों की आजीविका से जुड़ा हुआ है। उन्होंने चिंता जताई कि तेलंगाना को जितना पानी मिलना चाहिए, वास्तविकता में उससे काफी कम पानी प्राप्त हो रहा है। उनके अनुसार, राज्य को लगभग 15.9 टीएमसी पानी मिलने का अधिकार है, लेकिन वर्तमान में केवल 5 से 6 टीएमसी पानी ही उपलब्ध हो पा रहा है।
रेवंत रेड्डी ने कहा कि तुंगभद्रा परियोजना और राजोलीबांडा डायवर्जन स्कीम (RDS) से जुड़े मुद्दों का समाधान केवल राज्यों के आपसी प्रयासों से नहीं, बल्कि केंद्र सरकार की मध्यस्थता और प्रभावी समन्वय से संभव है। उन्होंने केंद्र से अनुरोध किया कि वह Karnataka, Telangana और Andhra Pradesh के बीच जल वितरण को लेकर एक मजबूत व्यवस्था विकसित करे ताकि किसी भी राज्य के हित प्रभावित न हों।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जोगुलाम्बा गडवाल जिले के लगभग 75 गांवों और हजारों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई तुंगभद्रा के पानी पर निर्भर है। यदि राज्य को उसका पूरा हिस्सा नहीं मिलता है, तो किसानों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने अधिकारियों को किसानों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाने के निर्देश दिए।
बैठक के दौरान राजोलीबांडा डायवर्जन स्कीम में गाद (सिल्ट) जमा होने की समस्या पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि भारी सिल्ट जमाव के कारण तेलंगाना की ओर पानी का प्रवाह प्रभावित हो रहा है। मुख्यमंत्री ने इस समस्या के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने और केंद्र सरकार से सहयोग मांगने के निर्देश दिए।
रेवंत रेड्डी ने सुझाव दिया कि तुंगभद्रा बोर्ड को और अधिक प्रभावी बनाया जाए तथा जल संसाधनों के न्यायसंगत उपयोग के लिए संस्थागत व्यवस्था को मजबूत किया जाए। उनका मानना है कि एक सशक्त निगरानी तंत्र राज्यों के बीच जल विवादों को कम करने और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में मदद कर सकता है।
गौरतलब है कि तुंगभद्रा और कृष्णा नदी के जल बंटवारे को लेकर वर्षों से विभिन्न राज्यों के बीच मतभेद बने हुए हैं। तेलंगाना लगातार यह दावा करता रहा है कि उसे उसके अधिकार के अनुरूप पानी नहीं मिल रहा है, जबकि राज्य सरकार का कहना है कि किसानों और सिंचाई परियोजनाओं के हितों की रक्षा के लिए जल हिस्सेदारी का मुद्दा प्राथमिकता के आधार पर उठाया जाएगा।
मुख्यमंत्री की यह अपील ऐसे समय में आई है जब अंतरराज्यीय जल विवादों को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार की मध्यस्थता से तुंगभद्रा परियोजना से जुड़े लंबित मुद्दों के समाधान की दिशा में नई पहल हो सकती है, जिससे क्षेत्र के किसानों और सिंचाई परियोजनाओं को लाभ मिलेगा।
