नई दिल्ली: कर्नाटक कैडर की दो हाई-प्रोफाइल महिला अधिकारियों— आईएएस (IAS) रोहिणी सिंदुरी और आईपीएस (IPS) डी. रूपा मुदगिल— के बीच पिछले तीन साल से चल रहा कानूनी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद सुलह की दिशा में बढ़ रहा है। शीर्ष अदालत ने देश के रिटायर्ड जस्टिस कुरियन जोसेफ से आग्रह किया है कि वे इस मामले में मध्यस्थता (Mediation) करें और दोनों अधिकारियों के बीच जारी इस जंग का कोई स्थायी समाधान निकालें।
जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए दोनों अधिकारियों को जुलाई में जस्टिस जोसेफ के सामने पेश होने का निर्देश दिया है।
- “दोनों अफसर अपना ही करियर बर्बाद कर रही हैं” — सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने दोनों वरिष्ठ महिला अधिकारियों के बीच चल रही इस कानूनी लड़ाई पर गहरी चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा:
अदालत ने दोनों पक्षों के वकीलों को सलाह दी कि वे अदालती कार्यवाही के बजाय मध्यस्थता के जरिए इस झगड़े को खत्म करने की संभावना तलाशें। दोनों ही अधिकारियों के वकीलों ने कोर्ट के इस सकारात्मक सुझाव को स्वीकार कर लिया, जिसके बाद कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट में चल रहे मानहानि के मुकदमों की कार्यवाही पर फिलहाल रोक लगा दी है।
- क्या है पूरा विवाद? (विवाद की टाइमलाइन)
ऑल इंडिया सर्विसेज की इन दो दिग्गज महिला अफसरों के बीच के इस विवाद की शुरुआत साल 2023 में हुई थी, जिसने देखते ही देखते एक बड़े प्रशासनिक और कानूनी संकट का रूप ले लिया:
- फरवरी 2023 (सोशल मीडिया वॉर): आईपीएस रूपा मुदगिल ने फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आईएएस रोहिणी सिंदुरी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने रोहिणी पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने समेत कई गंभीर आरोप लगाए और उनकी कुछ निजी तस्वीरें भी साझा कीं।
- रोहिणी सिंदुरी का कोर्ट रुख: इन आरोपों और टिप्पणियों के खिलाफ आईएएस रोहिणी सिंदुरी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने शुरुआती राहत देते हुए आईपीएस रूपा को इस तरह की अपमानजनक पोस्ट करने से रोक दिया।
- हाई कोर्ट से झटका: आईपीएस रूपा ने इस रोक के खिलाफ कर्नाटक हाई कोर्ट का रुख किया, लेकिन हाई कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया और आपराधिक मानहानि के मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया।
- सुप्रीम कोर्ट में अपील: हाई कोर्ट से राहत न मिलने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सर्वोच्च अदालत ने दोनों अफसरों को अपने मतभेद आपस में बैठकर सुलझाने की सलाह दी थी, जिसके बाद अब जस्टिस कुरियन जोसेफ को मध्यस्थ नियुक्त किया गया है।
- अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, अब यह हाई-प्रोफाइल मामला कोर्ट रूम से निकलकर मध्यस्थता टेबल पर पहुंचेगा। जुलाई में जस्टिस (रिटायर्ड) कुरियन जोसेफ के सामने दोनों महिला अधिकारी पेश होंगी। देश के एक सम्मानित और अनुभवी पूर्व न्यायाधीश की मौजूदगी में यह उम्मीद जताई जा रही है कि पिछले तीन साल से चल रहे इस गतिरोध का कोई सम्मानजनक और स्थायी रास्ता निकाला जा सकेगा, ताकि दोनों अधिकारी बिना किसी मानसिक तनाव के देश और राज्य की सेवा में अपना योगदान दे सकें।
