रांची। झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए गुरुवार को मतदान हो रहा है। चुनावी मैदान में तीन उम्मीदवार होने के कारण मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं, जबकि चुनावी नतीजा पूरी तरह विधायकों के संख्या बल और संभावित क्रॉस वोटिंग पर निर्भर माना जा रहा है।
- क्या है चुनावी गणित?
राज्यसभा की दो सीटों के लिए झामुमो और कांग्रेस ने एक-एक उम्मीदवार उतारा है, जबकि भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी भी मैदान में हैं। विधानसभा में INDIA गठबंधन के पास मजबूत संख्या बल है, जिसके आधार पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दोनों सीटें जीतने का दावा कर रहे हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि गठबंधन के सभी विधायक एकजुट रहते हैं तो दोनों सीटें INDIA ब्लॉक के खाते में जा सकती हैं। यही वजह है कि हेमंत सोरेन को ‘डबल बोनस’ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
- हेमंत सोरेन को क्यों है भरोसा?
मतदान से पहले हेमंत सोरेन ने गठबंधन विधायकों के साथ बैठक कर एकजुटता का संदेश दिया। सत्ता पक्ष का दावा है कि उनके पास दोनों उम्मीदवारों को जिताने के लिए पर्याप्त समर्थन मौजूद है।साथ ही सहयोगी दलों और निर्दलीय विधायकों के समर्थन ने भी गठबंधन की स्थिति को मजबूत बनाया है। यही कारण है कि झामुमो और कांग्रेस खेमे में आत्मविश्वास दिखाई दे रहा है।
- नाथवानी की उम्मीद किस पर टिकी?
भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी की राह आसान नहीं मानी जा रही है। हालांकि भाजपा को उम्मीद है कि कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं, जिससे मुकाबला रोचक हो सकता है।राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि विपक्ष अपेक्षा से अधिक समर्थन जुटाने में सफल रहता है तो दूसरी सीट पर समीकरण बदल सकते हैं। इसी संभावना के सहारे नाथवानी का चुनावी अभियान आगे बढ़ रहा है।
- क्रॉस वोटिंग पर टिकी सबकी नजर
राज्यसभा चुनाव में मतदान खुला होता है, लेकिन इसके बावजूद क्रॉस वोटिंग की आशंकाएं अक्सर चर्चा का विषय बनती हैं। इस बार भी दोनों खेमों ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए विशेष रणनीति बनाई है।वोटिंग से पहले कई दौर की बैठकों और राजनीतिक गतिविधियों ने यह संकेत दिया है कि दोनों पक्ष किसी भी तरह की चूक नहीं करना चाहते।
- किसके पक्ष में जाएगा फैसला?
पहली सीट पर INDIA गठबंधन की स्थिति मजबूत मानी जा रही है, जबकि दूसरी सीट को लेकर राजनीतिक हलकों में उत्सुकता बनी हुई है। यदि गठबंधन अपने वोट सुरक्षित रखने में सफल रहता है तो हेमंत सोरेन की रणनीति पूरी तरह सफल साबित हो सकती है।वहीं, अगर क्रॉस वोटिंग होती है तो भाजपा समर्थित परिमल नाथवानी चुनावी तस्वीर बदल सकते हैं।
- नतीजों पर टिकी निगाहें
अब पूरे राज्य की नजर मतदान और मतगणना पर है। नतीजे सिर्फ राज्यसभा की दो सीटों का फैसला नहीं करेंगे, बल्कि झारखंड की मौजूदा राजनीतिक ताकत और विपक्ष की रणनीति की भी परीक्षा माने जाएंगे। ऐसे में यह चुनाव राज्य की राजनीति के लिए काफी अहम माना जा रहा है।
