रायपुर। राजधानी रायपुर के बूढ़ापारा स्थित माधवराव सप्रे उत्कृष्ट हिंदी मीडियम स्कूल में 12वीं कक्षा के कॉमर्स और आर्ट्स संकाय के 46 विद्यार्थियों के सामने नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में ही पढ़ाई जारी रखने का संकट खड़ा हो गया। शिक्षकों की कमी के चलते स्कूल प्रबंधन ने छात्रों को ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) लेकर दूसरे स्कूलों में प्रवेश लेने की सलाह दे दी थी। इससे नाराज छात्रों ने बुधवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया।छात्रों के विरोध और हंगामे के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया और महज तीन घंटे के भीतर शिक्षकों की व्यवस्था करने का निर्णय ले लिया गया। जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर पिछले सत्र में जिला खनिज न्यास (DMF) मद से कार्यरत शिक्षकों को पुनः नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
- नए सत्र में नहीं मिले शिक्षक
जानकारी के अनुसार, पिछले शैक्षणिक सत्र में स्कूल में 12वीं कक्षा के कॉमर्स और आर्ट्स विषयों में विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया था। उस समय DMF फंड के माध्यम से शिक्षकों की व्यवस्था की गई थी। लेकिन 16 जून से शुरू हुए नए शैक्षणिक सत्र में इन विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को दूसरे स्कूलों में प्रवेश लेने की सलाह दी गई।
- छात्रों और एनएसयूआई ने खोला मोर्चा
शिक्षकों की कमी की जानकारी मिलते ही छात्र आक्रोशित हो गए। उनके समर्थन में एनएसयूआई कार्यकर्ता भी मैदान में उतर आए। छात्र नेता हेमंत पाल के नेतृत्व में छात्रों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया और तत्काल शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की।प्रदर्शन के दौरान जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल प्रबंधन से चर्चा की और पूर्व में कार्यरत शिक्षकों को पुनः सेवाएं देने के निर्देश जारी किए। इसके बाद छात्रों का आंदोलन समाप्त हुआ।
- छह महीने से भेजे जा रहे थे पत्र
स्कूल प्रबंधन का कहना है कि शिक्षकों की कमी को लेकर पिछले छह महीनों में जिला शिक्षा अधिकारी और कलेक्टर को तीन बार पत्र लिखे गए थे। इसके बावजूद समय रहते कोई समाधान नहीं निकाला गया। मामला तब सुर्खियों में आया जब छात्रों ने खुलकर विरोध प्रदर्शन किया।
- प्राचार्य ने कहा— अब नहीं होगी परेशानी
स्कूल की प्राचार्य अनुपमा श्रीवास्तव ने बताया कि कॉमर्स विषय का पद स्वीकृत नहीं होने के बावजूद विद्यार्थियों की मांग को देखते हुए प्रवेश दिया गया था। पिछले सत्र में DMF फंड से शिक्षक उपलब्ध कराए गए थे। अब जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देशानुसार पूर्व शिक्षकों को जारी रखने का निर्णय लिया गया है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी।
छात्रों के विरोध ने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया है। समय रहते शिक्षकों की नियुक्ति न होने से छात्रों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया था, जिसे आंदोलन के बाद तत्काल दूर करना पड़ा।
