लखनऊ। राजधानी के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड के मामले में पुलिस प्रशासन ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। इस हादसे के मुख्य आरोपियों में से एक और मौके पर संचालित हो रही ‘पेट शॉप’ (Pet Shop) के मालिक रामकृष्ण उपाध्याय (43) को अलीगंज पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। पुलिस ने आरोपी को अलीगंज मंदिर के पास से दबोचा, जिसके बाद उसे थाने लाकर गहन पूछताछ शुरू कर दी गई है।
इस दर्दनाक हादसे में अब तक 15 लोगों (मुख्य रूप से छात्रों) की जान जा चुकी है, जबकि कई अन्य घायल हैं।
लापरवाही और नियमों की अनदेखी का आरोप
पुलिस के अनुसार, प्राथमिक जांच में सामने आया है कि जिस तीन मंजिला इमारत में यह आग लगी, उसे कागजों पर सिर्फ ‘आवासीय’ (Residential) उपयोग की अनुमति थी। इसके बावजूद, वहां पूरी तरह से व्यावसायिक (Commercial) गतिविधियां चलाई जा रही थीं।
- ग्राउंड फ्लोर: रामकृष्ण उपाध्याय की पेट शॉप और क्लिनिक का गोदाम था, जहां से आग भड़कने की आशंका जताई जा रही है।
- ऊपरी मंजिलें: एक गेमिंग स्टूडियो और 3D एनिमेशन कोचिंग सेंटर चल रहा था।
एफआईआर के मुताबिक, इमारत में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। पूरी बिल्डिंग में आने-जाने के लिए केवल एक ही संकरा रास्ता (सिंगल एंट्री/एग्जिट) था, जिसके कारण आग लगने के बाद दम घुटने से ज्यादातर बच्चों की मौत हो गई।
कानूनी शिकंजा: 6 पर FIR, 4 गिरफ्तार
अलीगंज पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या), 125 (मानव जीवन को खतरे में डालना) और उत्तर प्रदेश फायर सर्विस एक्ट के तहत 6 नामजद लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
अब तक पुलिस इस मामले में 4 बड़ी गिरफ्तारियां कर चुकी है:
- रामकृष्ण उपाध्याय (पेट शॉप मालिक)
- वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (बिल्डिंग मालिक)
- तुषार/तुषक कृष्णा जायसवाल (एनिमेशन सेंटर संचालक)
- सुरेश कुमार साहू (किरायेदार/साझेदार)
मुख्यमंत्री सख्त, SIT करेगी जांच
इस हादसे को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेहद सख्त नजर आ रहे हैं। उन्होंने घटना की गंभीरता को देखते हुए एक दो-सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जिसे 7 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, शुरुआती जांच में लापरवाही बरतने के आरोप में फायर सर्विस और एलडीए (LDA) के 4 जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से स निलंबित (Suspend) कर दिया गया है।
अलीगंज पुलिस रामकृष्ण उपाध्याय और अन्य आरोपियों से यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बिना फायर एनओसी (No Objection Certificate) और बिना सुरक्षा मानकों के यह कमर्शियल कॉम्प्लेक्स इतने समय से कैसे चल रहा था। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के बाद कोर्ट में सख्त पैरवी कर दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जाएगी।
