संसद के मानसून सत्र के बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़ा एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़कर नई पार्टी NCPI में शामिल हुए 20 बागी सांसदों को लोकसभा में अलग संसदीय दल के रूप में मान्यता नहीं मिली है। लोकसभा सचिवालय के इस फैसले के बाद इन सांसदों को सदन में अलग से बैठने की अनुमति भी नहीं मिलेगी।
लोकसभा में अलग दल की मांग खारिज
टीएमसी से अलग होने के बाद इन सांसदों ने दावा किया था कि वे अब NCPI के सदस्य हैं और उन्हें लोकसभा में अलग संसदीय दल के रूप में मान्यता दी जाए। इसके साथ ही उन्होंने सदन में अलग सीट आवंटित करने की भी मांग की थी। हालांकि, लोकसभा सचिवालय ने उनकी इस मांग को स्वीकार नहीं किया, जिससे बागी सांसदों को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है।
एनडीए की बैठक से भी रहे दूर
सूत्रों के अनुसार, इन सांसदों ने मानसून सत्र से पहले आयोजित एनडीए संसदीय दल की बैठक में भी हिस्सा नहीं लिया। हालांकि इससे पहले बागी सांसदों ने केंद्र सरकार और एनडीए को समर्थन देने की बात कही थी।
विधानसभा चुनाव के बाद बढ़ी थी बगावत
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में असंतोष खुलकर सामने आया। पार्टी के भीतर शुरू हुई कलह धीरे-धीरे विधानसभा और संसद दोनों तक पहुंच गई।बताया जा रहा है कि विधानसभा में ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में दर्जनों विधायकों ने अलग गुट बना लिया था। वहीं संसद में टीएमसी के 28 सांसदों में से 20 सांसद पार्टी छोड़कर NCPI में शामिल हो गए। इन बागी सांसदों में सायनी घोष और युसुफ पठान जैसे प्रमुख नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं।
सर्वदलीय बैठक में भी हुआ था विवाद
मानसून सत्र शुरू होने से पहले केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में भी इस मुद्दे पर विवाद देखने को मिला था। टीएमसी के बागी सांसदों की मौजूदगी पर विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताया और कुछ समय के लिए बैठक से वॉकआउट भी किया। बाद में विपक्षी नेता दोबारा बैठक में शामिल हुए।
मानसून सत्र के दूसरे दिन भी हंगामे के आसार
संसद के मानसून सत्र का दूसरा दिन भी हंगामेदार रहने की संभावना है। पहले दिन विभिन्न मुद्दों को लेकर लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी थी। विपक्ष ने नीट पेपर लीक, राम मंदिर चढ़ावा चोरी समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरा और दोनों सदनों में जोरदार नारेबाजी की।
रेणुका चौधरी ने लगाया गंभीर आरोप
कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने संसद में नियम 267 के तहत कार्यस्थगन प्रस्ताव का नोटिस देते हुए आरोप लगाया कि संसद परिसर के कई प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए और इंटरनेट सेवाएं भी बाधित की गईं। उनका दावा है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि सांसद संसद के बाहर प्रदर्शन कर रहे लोगों से मुलाकात न कर सकें।
राजनीतिक मायने
लोकसभा में अलग दल की मान्यता नहीं मिलने से टीएमसी छोड़ चुके सांसदों की संसदीय रणनीति को बड़ा झटका माना जा रहा है। अब उनकी आगे की राजनीतिक दिशा और संसद में उनकी भूमिका पर सभी की नजर रहेगी। वहीं इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति और संसद के मानसून सत्र दोनों में सियासी हलचल तेज कर दी है।
