बैकुंठपुर (कोरिया)। नौगई हत्याकांड में मृतक भरत सिंह की तेरहवीं के अवसर पर मंगलवार को आयोजित श्रद्धांजलि सभा न्याय की मांग को लेकर एक बड़े जनसमागम में बदल गई। कार्यक्रम में करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह तोमर सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और समाज के लोग शामिल हुए। इस दौरान पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए मामले में निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई की मांग दोहराई गई।
सभा को संबोधित करते हुए करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत ने कहा कि केवल कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी से न्याय की प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जा सकती। उनका आरोप था कि मामले से जुड़े प्रभावशाली लोगों तक जांच नहीं पहुंची है, जिससे पीड़ित परिवार और समाज में असंतोष है। उन्होंने कहा कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो लोगों का कानून व्यवस्था पर विश्वास कमजोर होगा।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह तोमर ने राज्य सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखीं। इनमें प्रदेश के गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग, मामले की जांच CBI अथवा उच्च स्तरीय विशेष जांच दल (SIT) से कराने, संदिग्ध भूमिका वाले पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करने तथा सभी सह-आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी शामिल है।
कार्यक्रम के दौरान पीड़ित परिवार के सदस्य राजेंद्र सिंह ने भावुक होते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का राजनीतिक विवाद खड़ा करना नहीं है, बल्कि केवल न्याय प्राप्त करना है। उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र में भय का माहौल होने के कारण कई संभावित गवाह खुलकर सामने आने से हिचक रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।
करणी सेना ने घोषणा की कि यदि 19 जुलाई तक मामले में संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती है तो उसी दिन दोपहर 1:15 बजे घटनास्थल पर विशाल श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाएगी। संगठन ने प्रदेशभर से समाज के लोगों और न्याय की मांग का समर्थन करने वालों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है।
वीरेंद्र सिंह तोमर ने स्पष्ट कहा कि करणी सेना पीड़ित परिवार के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तय समय सीमा तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राज्य सरकार या पुलिस प्रशासन की ओर से कोई नया आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में जांच की दिशा और प्रशासनिक कार्रवाई किस रूप में आगे बढ़ती है। यदि मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती, तो नौगई हत्याकांड आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति और कानून व्यवस्था के लिए एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।
