रायपुर। छत्तीसगढ़ में महादेव सट्टा एप, शराब घोटाला, डीएमएफ (जिला खनिज न्यास) और कोयला परिवहन से जुड़े मामलों की जांच में आई तेजी ने प्रदेश की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है। जांच एजेंसियों की लगातार सक्रियता के बीच सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आमने-सामने आ गए हैं। दोनों दल एक-दूसरे पर तीखे राजनीतिक हमले कर रहे हैं और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक गर्माने के संकेत मिल रहे हैं।भाजपा का कहना है कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर काम कर रही है और कानून अपना काम कर रहा है। वहीं कांग्रेस का आरोप है कि केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने और राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से किया जा रहा है।
जांच के दायरे में कई चर्चित मामले
प्रदेश में महादेव सट्टा एप, शराब घोटाला, डीएमएफ फंड और कोयला परिवहन से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई लगातार तेज हो रही है। इन मामलों में हुई कार्रवाई और पूछताछ के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। सत्ता और विपक्ष दोनों की निगाहें अब जांच के अगले चरण और संभावित राजनीतिक प्रभावों पर टिकी हुई हैं।
भाजपा ने कांग्रेस पर बोला हमला
भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कई बड़े घोटाले सामने आए, जिनमें शराब, कोयला, डीएमएफ और पीएससी जैसे मामले शामिल हैं। पार्टी का दावा है कि वर्तमान सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई कर रही है और दोषियों को कानून के अनुसार जवाब देना होगा।कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार के अनेक मामले सामने आए। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांत पर कार्य करते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है।
कांग्रेस ने लगाए राजनीतिक प्रतिशोध के आरोप
कांग्रेस ने भाजपा सरकार और केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि विपक्षी नेताओं को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा सरकार के कई मंत्रियों पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों का उपयोग राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है।
विधानसभा से लेकर सियासी मंच तक गूंजा मुद्दा
भ्रष्टाचार और जांच एजेंसियों की कार्रवाई का मुद्दा विधानसभा के मानसून सत्र में भी जोर-शोर से उठा। सत्ता पक्ष ने कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए विपक्ष को घेरा, जबकि कांग्रेस ने सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप दोहराया।
आगे और तेज हो सकती है सियासी लड़ाई
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि जांच एजेंसियों की कार्रवाई इसी गति से जारी रहती है, तो आने वाले महीनों में प्रदेश की राजनीति में कई नए घटनाक्रम सामने आ सकते हैं। फिलहाल महादेव, शराब, डीएमएफ और कोयला मामलों की जांच ने छत्तीसगढ़ की सियासत को फिर से भ्रष्टाचार बनाम राजनीतिक प्रतिशोध की बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है।
