बेंगलुरु: कर्नाटक में एक बार फिर ‘व्हाइट पेपर’ (श्वेत पत्र) को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया है। कर्नाटक के होम मिनिस्टर प्रियंक खरगे ने बीजेपी के युवा सांसद तेजस्वी सूर्या पर तीखा पलटवार किया है।
तेजस्वी सूर्या ने बेंगलुरु के इंफ्रास्ट्रक्चर और सड़कों की खराब हालत पर राज्य सरकार से ‘व्हाइट पेपर’ मांगा था, जिसके जवाब में खरगे ने उन्हें पहले मोदी सरकार से ‘अच्छे दिन’ का हिसाब मांग लेने की नसीहत दे डाली। पूरी खबर के हवाले से नीचे विस्तार से दी गई है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने कर्नाटक के ग्रेटर बेंगलुरु डेवलपमेंट मिनिस्टर कृष्णा बायरे गोवड़ा से मांग की थी कि पिछले 3 सालों में बेंगलुरु की सड़कों पर खर्च किए गए ₹5,500 करोड़ का पूरा हिसाब (व्हाइट पेपर) 30 दिनों के भीतर जनता के सामने लाया जाए। सूर्या का आरोप है कि इतना पैसा खर्च होने के बाद भी शहर की सड़कों पर गड्ढे भरे पड़े हैं और प्रशासनिक नाकामी की वजह से मेट्रो सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
प्रियंक खरगे का करारा पलटवार
तेजस्वी सूर्या की इस डिमांड पर पलटवार करते हुए प्रियंक खरगे ने कहा कि कर्नाटक की अर्थव्यवस्था नेशनल एवरेज से बेहतर चल रही है और राज्य सरकार का सारा डेटा बिल्कुल ट्रांसपेरेंट है। उन्होंने सूर्या को घेरते हुए कहा:
- ‘अच्छे दिन’ का व्हाइट पेपर: “पहले मोदी सरकार से ‘अच्छे दिन’, ‘विकसित भारत’, ‘अमृत काल’, और ‘मेक इन इंडिया’ पर व्हाइट पेपर मांगो।”
- रोजगार और इकोनॉमी: “जो हर साल 2 करोड़ नौकरियों का वादा किया गया था, जो देश में फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) कम हो रहा है, और डॉलर के मुकाबले रुपये की जो हालत है, पहले उसका व्हाइट पेपर लेकर आओ।”
- निर्मला सीतारमण पर निशाना: खरगे ने याद दिलाया कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी कर्नाटक से ही आती हैं, इसलिए केंद्र सरकार को देश की आर्थिक स्थिति का हिसाब पहले देना चाहिए।
RSS पर भी साधा निशाना
इसके साथ ही, खरगे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर भी मजाकिया लहजे में तंज कसा। पिछले दिनों (15 जून) उन्होंने आरएसएस को एक खुला पत्र लिखकर उनकी लीगल स्टेटस और फाइनेंशियल ट्रांसपेरेंसी पर सवाल उठाए थे।
जब मीडिया ने उनसे आरएसएस के जवाब के बारे में पूछा, तो खरगे ने हंसते हुए कहा:
उन्होंने आगे कहा कि ये लोग हर पॉलिसी पर अपनी राय रखते हैं, लेकिन जब खुद के दस्तावेज दिखाने की बात आती है, तो पीछे हट जाते हैं।
शॉर्ट समरी: बेंगलुरु की सड़कों के गड्ढों से शुरू हुई यह लड़ाई अब ‘अच्छे दिन’, रुपये-डॉलर की कीमत और आरएसएस की ट्रांसपेरेंसी तक पहुंच चुकी है। अब देखना यह है कि बीजेपी इस पर क्या पलटवार करती है!
