रायपुर/नया रायपुर नया रायपुर के नक्ती गांव में मंगलवार सुबह प्रशासन की एक बड़ी और ताबड़तोड़ कार्रवाई से हड़कंप मच गया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासन ने 14 बुलडोजरों (JCB) की मदद से करीब 85 घरों को जमींदोज कर दिया। इस कार्रवाई के बाद 100 से अधिक गरीब परिवार खुले आसमान के नीचे आ गए हैं। ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि यह पूरी कार्रवाई वहां ‘विधायक कॉलोनी’ बनाने के लिए की गई है।
इस अमानवीय कार्रवाई के खिलाफ क्षत्रिय करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं समाजसेवी वीरेंद्र सिंह तोमर ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है। बेघर हुए सैकड़ों लोग इस समय रायपुर में धरने पर बैठ गए हैं और इलाके में भारी तनाव का माहौल है।
https://www.facebook.com/share/v/1CjFGzXW1k/
छावनी में बदला नक्ती गांव: 4000 पुलिसकर्मी और 14 बुलडोजर
मंगलवार सुबह जैसे ही प्रशासन द्वारा दिया गया 48 घंटे का नोटिस खत्म हुआ, नगर निगम, राजस्व विभाग, SDRF और पुलिस की संयुक्त टीम भारी अमले के साथ नक्ती गांव पहुंच गई।
- सुरक्षा के कड़े इंतजाम: कार्रवाई के दौरान लगभग 4000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।
- तनाव की स्थिति: घर टूटते देख ग्रामीणों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की भी देखने को मिली।
“बारिश में आशियाना छीनना घृणित और अमानवीय” – वीरेंद्र सिंह तोमर
इस पूरी घटना पर गहरा आक्रोश जताते हुए करणी सेना के मुखिया वीरेंद्र सिंह तोमर ने प्रशासन की कार्रवाई को ‘गरीब विरोधी’ करार दिया। पीड़ितों से मुलाकात के बाद उन्होंने सरकार को आड़े हाथों लिया।
करणी सेना ने प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल पुनर्वास (Rehabilitation) और मुआवजे की मांग करते हुए प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
ग्रामीणों के सुलगते सवाल: “जब सुविधाएं दीं, तो अब अतिक्रमणकारी क्यों?”
नक्ती गांव के विस्थापितों ने सरकार और प्रशासन की मंशा पर बड़े सवाल खड़े किए हैं:
- सालों पुराना आशियाना: ग्रामीणों का कहना है कि वे यहाँ कोई दो-चार दिन से नहीं, बल्कि सालों से रह रहे हैं।
- सरकारी सुविधाएं क्यों दीं?: यदि यह जमीन अवैध थी, तो सरकार ने यहाँ बिजली, पानी, सड़क, शौचालय और स्कूल जैसी सरकारी सुविधाएं क्यों उपलब्ध कराई थीं?
- बिना पुनर्वास के बेदखली: ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था या पुनर्वास के अचानक सड़क पर फेंक दिया गया।
प्रशासन का पक्ष
इस मामले में फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि, जमीनी स्तर पर अधिकारियों का दावा है कि यह पूरी कार्रवाई नियमों के तहत अतिक्रमण हटाने के लिए की गई है।
न्यूज़ डैस्क की रिपोर्ट
नक्ती गांव का यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। वीरेंद्र सिंह तोमर और ग्रामीणों का सीधा सवाल है कि अगर यह जमीन ‘विधायक कॉलोनी’ के लिए आरक्षित की भी गई थी, तो पहले इन 85 गरीब परिवारों के रहने का इंतजाम क्यों नहीं किया गया? बारिश के इस मौसम में बेघर हुए परिवारों का धरना प्रदर्शन अब राजधानी रायपुर की राजनीति को गरमाने के लिए तैयार है।
