नई दिल्ली। ओमान की खाड़ी में खड़े भारतीय वाणिज्यिक जहाजों (Commercial Ships) पर हुए संदिग्ध मिसाइल हमलों ने वैश्विक राजनीति और भारत की विदेश नीति के गलियारों में भूचाल ला दिया है। इन हमलों में तीन भारतीय नाविकों की दर्दनाक मौत हो गई है, जिसके बाद भारत सरकार ने अमेरिका के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है।इस बीच, देश के शीर्ष रक्षा विशेषज्ञों ने अमेरिका के इस कदम पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है और वाशिंगटन की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
- दो जहाजों को बनाया गया निशाना, 3 की मौत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ओमान की खाड़ी में दो तेल टैंकरों पर हमले हुए हैं:
- MT Settebello: इस जहाज पर हुए संदिग्ध मिसाइल हमले में तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई। जहाज पर सवार कुल 24 क्रू सदस्यों में से 21 को ओमान की सेना ने सुरक्षित बचा लिया है।
- MT Jalbir: इस दूसरे जहाज पर भी इसी तरह हमला किया गया, हालांकि राहत की बात यह रही कि इस पर सवार सभी 20 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया। ओमान में भारतीय दूतावास ने इनकी तस्वीरें साझा कर सुरक्षित वतन वापसी का भरोसा दिया है।
इस घटना पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों की आड़ में आम कारोबारी जहाजों और बेगुनाह नाविकों की सुरक्षा को खतरे में नहीं डाला जाना चाहिए।
- “अमेरिका की दोस्ती जानलेवा है” — मेजर जनरल (रि.) जीडी बख्शी
प्रसिद्ध रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल (रि.) जीडी बख्शी ने इस घटना पर तीखा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर के एक मशहूर कथन का जिक्र करते हुए सोशल मीडिया (X) पर लिखा:जीडी बख्शी ने अमेरिकी ‘गन-बोट डिप्लोमेसी’ (ताकत के दम पर मनमानी) की आलोचना करते हुए कहा, “वीडियो क्लिप्स से साफ है कि भारतीय जहाज रुका हुआ था। अमेरिकी नौसेना और जहाज के बीच क्या बातचीत हुई, उसकी कोई ट्रांसक्रिप्ट नहीं दी गई है। अमेरिका ने हमारे जहाजों पर हमला करके हमारी दोस्ती का यह सिला दिया है।”उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब तक भारत ने कड़ा जवाब नहीं दिया था, तब तक निहत्थों को मारना पाकिस्तान की आदत थी, और अब अमेरिका भी उसी राह पर है। उन्होंने सवाल उठाया, “क्या हम 250 साल की गुलामी वाली सोच से बाहर निकलकर 10,000 साल पुरानी सभ्यता की तरह गरिमापूर्ण व्यवहार नहीं कर सकते? जरा देखिए, चीन ने ट्रंप के साथ कैसा कड़ा बर्ताव किया।”
- रूस और चीन के जहाजों को क्यों नहीं छुआ?
विशेषज्ञों ने अमेरिका के इस दोहरे रवैये पर उसकी पोल खोलकर रख दी है।
- चीन ने तोड़ी नाकेबंदी: रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, चीन और रूस के 100 से अधिक जहाजों ने अमेरिका की इस नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) को तोड़ा है। ईरान का 90 फीसदी तेल चीन जाता है।
- सिर्फ भारत पर वार: वाशिंगटन जिन्हें कच्चे तेल की ढुलाई करने वाला ‘शैडो फ्लीट’ बताता है, वे मुख्य रूप से चीन और रूस से जुड़े हैं। इसके बावजूद, 13 अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति के आदेश से शुरू हुई नाकेबंदी के बाद से अमेरिकी सेना ने किसी भी चीनी या रूसी जहाज पर उंगली तक नहीं उठाई।
- रणनीतिक साझेदारी पर डॉ. ब्रह्मा चेलानी का बड़ा सवाल
प्रख्यात रणनीतिक विश्लेषक डॉ. ब्रह्मा चेलानी ने भारत सरकार की कूटनीति पर सवाल उठाते हुए इसे एक बड़ी विडंबना बताया। चेलानी ने कहा:
डॉ. चेलानी ने खुलासा किया कि अमेरिकी नौसेना का इन कमर्शियल टैंकरों के क्रू के साथ सीधा संपर्क था। हमला करने से ठीक पहले अमेरिकी नौसेना को यह पूरी तरह पता था कि जहाज पर सवार नाविक भारतीय नागरिक हैं, फिर भी जानबूझकर यह हमला किया गया।
- क्या है पूरा विवाद?
यह पूरा विवाद अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग (जैसे- होर्मुज और ओमान की खाड़ी) पर बिना किसी अंतरराष्ट्रीय कानूनी आधार के लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी के बाद शुरू हुआ है। भारत में अब इस बात को लेकर भारी गुस्सा है कि शुरुआत में इस मामले को नजरअंदाज करने की कोशिश की गई, लेकिन जनता के आक्रोश के बाद सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। अब देखना यह है कि नई दिल्ली इस कूटनीतिक धोखे का वाशिंगटन को क्या जवाब देती है।
