नई दिल्ली: हजारों किलोमीटर दूर दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप का असर अब भारत के तेल कारोबार पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वहां कच्चे तेल की सप्लाई लंबे समय तक प्रभावित रहती है, तो भारत को वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करनी पड़ सकती है, जिससे तेल की लागत बढ़ने की आशंका है।
- वेनेजुएला क्यों बना भारत के लिए अहम?
मिडिल ईस्ट में लंबे समय से जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आपूर्ति संबंधी जोखिमों के चलते भारत ने हाल के महीनों में वेनेजुएला से कच्चे तेल का आयात तेजी से बढ़ाया था। अप्रैल और मई के दौरान भारत की कई रिफाइनरी कंपनियों ने वहां से रिकॉर्ड मात्रा में तेल खरीदा, जिससे वेनेजुएला भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हो गया।
- भूकंप से कैसे प्रभावित होगी तेल सप्लाई?
भूकंप के बाद कई इलाकों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई है। सड़क और परिवहन नेटवर्क को नुकसान पहुंचा है, जबकि कई बंदरगाहों पर आपातकालीन प्रतिबंध लागू किए गए हैं। प्रमुख कार्गो पोर्ट ला गुआइरा को आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित किया गया है, जिसके कारण जहाजों की आवाजाही और माल लोडिंग में देरी हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही तेल निर्यात टर्मिनल सुरक्षित हों, लेकिन लॉजिस्टिक बाधाओं के चलते सप्लाई चेन प्रभावित होने की पूरी संभावना है।
- क्या बढ़ जाएंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?
फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तुरंत बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। हालांकि, यदि जहाजों की आवाजाही में देरी होती है, शिपिंग लागत और बीमा प्रीमियम बढ़ते हैं या वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़ते हैं, तो कच्चे तेल की कुल लागत बढ़ सकती है।
अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर भारतीय रिफाइनरियों की लागत पर पड़ेगा, जिसका प्रभाव भविष्य में ईंधन की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।
- बीमा कंपनियों के सामने भी नई चुनौती
अब तक वेनेजुएला से जुड़े समुद्री मार्गों में मुख्य जोखिम भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध माने जाते थे। लेकिन भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं ने बीमा कंपनियों के लिए जोखिम का दायरा और बढ़ा दिया है। इससे समुद्री बीमा की लागत भी बढ़ सकती है।
- भारत के निवेश पर भी पड़ सकता है असर
भारत की सरकारी कंपनी ओएनजीसी विदेश ने वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में निवेश किया हुआ है। यदि वहां उत्पादन और निर्यात लंबे समय तक बाधित रहता है, तो इसका असर भारत के आर्थिक और कारोबारी हितों पर भी पड़ सकता है।
- भारत-वेनेजुएला संबंधों पर भी नजर
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के बीच दोनों देशों के आर्थिक सहयोग और निवेश को लेकर चर्चा हुई थी। दोनों नेताओं ने खनन, महत्वपूर्ण खनिज, फार्मास्यूटिकल्स और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने पर भी बातचीत की थी। हालांकि, मौजूदा प्राकृतिक आपदा के चलते इन योजनाओं की गति प्रभावित हो सकती है।
वेनेजुएला में आया भूकंप भारत के लिए तत्काल ईंधन संकट का संकेत नहीं है, लेकिन यदि कच्चे तेल की आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रहती है तो शिपिंग, बीमा और आयात लागत बढ़ सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में वैश्विक तेल बाजार और भारत की आयात रणनीति पर सभी की नजर रहेगी।
