हैदराबाद: तेलंगाना में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने इस प्रक्रिया का विरोध करने पर कांग्रेस और भारत राष्ट्र समिति (BRS) को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों पार्टियां ‘मजलिस’ (AIMIM) के इशारे पर काम कर रही हैं।
‘मजलिस के साथ मिलीभगत’ — किशन रेड्डी का आरोप
केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि SIR की कवायद देश के कई राज्यों में शुरू हो चुकी है, लेकिन तेलंगाना में कांग्रेस और BRS इसका विरोध कर रहे हैं।
उन्होंने तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी पर निशाना साधते हुए कहा:
ओवैसी और कांग्रेस को क्यों है आपत्ति?
इससे पहले AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने SIR प्रक्रिया को बेहद जटिल बताते हुए आम जनता के लिए परेशानी का सबब बताया था। ओवैसी का कहना है कि:
- नागरिकता पर संकट का डर: यदि किसी वैध मतदाता का नाम अंतिम सूची में छूट जाता है, तो सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार चुनाव आयोग को वह नाम गृह मंत्रालय (MHA) को भेजना होगा, जिससे नागरिकता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
- दस्तावेजों की समस्या: हालांकि उन्होंने सहायता के लिए ‘मीसेवा’ केंद्रों की संख्या बढ़ाने पर सीएम रेवंत रेड्डी का आभार जताया, लेकिन उनका कहना है कि 2002 के पुराने रिकॉर्ड्स को मैप करना और दस्तावेज जुटाना आम लोगों के लिए काफी मुश्किल है।
इसी बीच मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने भी अपनी पार्टी के नेताओं को सतर्क रहने को कहा है ताकि किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम लिस्ट से गलत तरीके से न कटे।
क्या है SIR का पूरा शेड्यूल?
- 25 जून, 2026: बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) द्वारा घर-घर जाकर फॉर्म बांटने का काम शुरू हुआ।
- 31 जुलाई, 2026: ड्राफ्ट (प्रारंभिक) वोटर लिस्ट का प्रकाशन किया जाएगा।
- 31 जुलाई से 30 अगस्त, 2026: इस दौरान लोग अपनी आपत्तियां या दावे दर्ज करा सकेंगे।
- 1 अक्टूबर, 2026: अंतिम (Final) मतदाता सूची जारी की जाएगी।
