नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है और इस बार राजनीतिक रूप से कई अहम मुद्दों पर देश की नजर रहेगी। केंद्र सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। इन दोनों प्रस्तावों को संवैधानिक संशोधन की श्रेणी में होने के कारण संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी।सूत्रों के अनुसार, सरकार ने इस बार संख्या बल को लेकर व्यापक रणनीति तैयार की है। अप्रैल में पर्याप्त समर्थन नहीं मिलने के कारण इन विधेयकों को आगे नहीं बढ़ाया जा सका था, लेकिन अब बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच सरकार को पहले की तुलना में अधिक समर्थन मिलने की उम्मीद है।
आठ महत्वपूर्ण विधेयकों पर रहेगा फोकस
मानसून सत्र के दौरान सरकार कई अहम विधेयक संसद में पेश कर सकती है। इनमें आयकर संशोधन विधेयक-2026, सर्वोच्च न्यायालय संशोधन विधेयक-2026, महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक प्रमुख माने जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य लंबित विधायी कार्यों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ प्रशासनिक और न्यायिक सुधारों से जुड़े प्रस्तावों को भी मंजूरी दिलाना है।
संख्या बल पर टिकी निगाहें
महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों को पारित कराने के लिए सरकार को लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ महीनों में विपक्षी दलों के भीतर हुए बदलाव और कुछ क्षेत्रीय दलों के बदले रुख से सत्तारूढ़ गठबंधन की स्थिति पहले से मजबूत हुई है।संसद के भीतर सहयोगी दलों के अलावा कुछ अन्य दलों के समर्थन की संभावना भी जताई जा रही है। यदि सरकार अपेक्षित समर्थन जुटाने में सफल रहती है, तो इन महत्वपूर्ण विधेयकों के पारित होने की संभावना काफी बढ़ सकती है।
विपक्ष भी करेगा सरकार को घेरने की तैयारी
दूसरी ओर विपक्ष ने भी मानसून सत्र में सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की रणनीति बनाई है। पेपर लीक, अयोध्या राम मंदिर निर्माण से जुड़े सवाल, महंगाई, बेरोजगारी और अन्य जनहित के मुद्दों को लेकर विपक्ष सरकार से जवाब मांग सकता है। ऐसे में सत्र के दौरान तीखी बहस और राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है।
महिला आरक्षण और परिसीमन क्यों हैं अहम?
महिला आरक्षण विधेयक का उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है, जबकि परिसीमन विधेयक के माध्यम से जनसंख्या के आधार पर संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण किया जाता है। दोनों प्रस्तावों का देश की राजनीतिक व्यवस्था और भविष्य की चुनावी रणनीति पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सरकार आवश्यक समर्थन जुटाने में सफल रहती है, तो मानसून सत्र देश की संसदीय राजनीति के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है।
