नई दिल्ली: कांग्रेस महासचिव और सांसद K. C. Venugopal ने एनसीईआरटी की नई पाठ्यपुस्तकों में शामिल किए गए ‘इमरजेंसी’ (आपातकाल) संबंधी अध्याय को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा और पाठ्यक्रम के माध्यम से इतिहास को अपने राजनीतिक दृष्टिकोण के अनुसार ढालने का प्रयास कर रही है, जो देश के संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए चिंता का विषय है।
वेणुगोपाल ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य छात्रों को निष्पक्ष, संतुलित और तथ्यपरक जानकारी देना होना चाहिए, न कि किसी राजनीतिक विचारधारा को बढ़ावा देना। उनके मुताबिक, मौजूदा सरकार पाठ्यक्रम में लगातार बदलाव कर इतिहास की घटनाओं को एक खास नजरिए से प्रस्तुत करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसे संविधान की मूल भावना और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला करार दिया।
कांग्रेस नेता की यह प्रतिक्रिया उस समय आई है जब National Council of Educational Research and Training की नई सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में पहली बार आपातकाल (1975-77) पर एक विस्तृत अध्याय शामिल किया गया है। पुस्तक में आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। साथ ही उस दौर में मौलिक अधिकारों के निलंबन, राजनीतिक विरोधियों की गिरफ्तारी और प्रेस पर लगाए गए प्रतिबंधों का भी उल्लेख किया गया है।
वेणुगोपाल ने कहा कि इतिहास के महत्वपूर्ण अध्यायों को पढ़ाना आवश्यक है, लेकिन उन्हें राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था के जरिए नई पीढ़ी की सोच को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है। उनका कहना था कि पाठ्यक्रम में बदलाव का उद्देश्य छात्रों को तथ्यों से अवगत कराना होना चाहिए, न कि किसी विशेष राजनीतिक नैरेटिव को स्थापित करना।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि देश की शिक्षा नीति को संविधान में निहित लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, समानता और सामाजिक न्याय जैसे मूल्यों को मजबूत करने पर केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इतिहास और शिक्षा को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया गया तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों की समझ और लोकतांत्रिक चेतना पर पड़ सकता है।
दूसरी ओर, सरकार और एनसीईआरटी का कहना है कि पाठ्यक्रम में किए गए बदलाव छात्रों को भारतीय लोकतंत्र के विभिन्न पहलुओं और ऐतिहासिक घटनाओं के बारे में व्यापक जानकारी देने के उद्देश्य से किए गए हैं। उनका तर्क है कि आपातकाल भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है और छात्रों को इसके बारे में जानकारी होना आवश्यक है ताकि वे लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक अधिकारों के महत्व को बेहतर ढंग से समझ सकें।
इमरजेंसी अध्याय को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। जहां कांग्रेस इसे इतिहास और शिक्षा के राजनीतिकरण की कोशिश बता रही है, वहीं सरकार इसे छात्रों को लोकतांत्रिक मूल्यों और देश के राजनीतिक इतिहास से परिचित कराने की पहल के रूप में पेश कर रही है। ऐसे में यह मुद्दा आने वाले दिनों में शिक्षा और राजनीति दोनों क्षेत्रों में बहस का विषय बना रह सकता है।
