अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी से जुड़े विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। सोमवार को हुई फ़ैज़ाबाद बार एसोसिएशन की आम सभा की बैठक में अधिवक्ताओं ने कई महत्वपूर्ण और सख्त फैसले लिए। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की ओर से बार एसोसिएशन का कोई भी सदस्य अदालत में पैरवी नहीं करेगा।
बैठक में यह भी प्रस्ताव पारित किया गया कि यदि कोई अधिवक्ता बार एसोसिएशन के इस निर्णय की अवहेलना करते हुए आरोपियों की ओर से अदालत में पेश होता है, तो उस पर 5 लाख रुपये का आर्थिक दंड लगाया जाएगा। साथ ही उसकी बार एसोसिएशन की सदस्यता समाप्त करने की कार्रवाई भी की जाएगी।
- तीन प्रमुख लोगों को अयोध्या छोड़ने की चेतावनी
आम सभा के दौरान अधिवक्ताओं ने चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ भी कड़ा रुख अपनाया। बैठक में मांग की गई कि तीनों व्यक्ति तीन दिनों के भीतर अयोध्या छोड़ दें। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय के भीतर ऐसा नहीं किया गया, तो व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा और पूरे शहर की नाकाबंदी कर बाहरी लोगों के प्रवेश को रोकने का प्रयास किया जाएगा।
- अदालत का दरवाजा खटखटाएगा बार एसोसिएशन
फ़ैज़ाबाद बार एसोसिएशन ने यह भी घोषणा की कि तीनों लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराने के लिए अदालत में दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 156(3) के तहत आवेदन दायर किया जाएगा। इसके साथ ही पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग भी उठाई जाएगी, ताकि सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच हो सके।
- भावनाएं आहत होने की बात कही
बार एसोसिएशन के सचिव शैलेंद्र जायसवाल ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की घटना से लोगों की धार्मिक भावनाएं गहराई से आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि इसी कारण अधिवक्ताओं ने सर्वसम्मति से आरोपियों की ओर से पैरवी नहीं करने का निर्णय लिया है।
- पहले भी ले चुका है ऐसा फैसला
यह पहला अवसर नहीं है जब फ़ैज़ाबाद बार एसोसिएशन ने किसी चर्चित मामले में ऐसा निर्णय लिया हो। इससे पहले वर्ष 2005 में राम मंदिर पर हुए चरमपंथी हमले के मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पैरवी नहीं करने का फैसला भी एसोसिएशन ने लिया था। उस समय भी अधिवक्ताओं ने सर्वसम्मति से आरोपियों की ओर से अदालत में पेश न होने का निर्णय लिया था।
- मामले पर बढ़ी राजनीतिक और सामाजिक हलचल
बार एसोसिएशन के इस फैसले के बाद अयोध्या में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। मामले को लेकर विभिन्न संगठनों और आम लोगों के बीच भी चर्चा का माहौल है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आगामी दिनों में प्रशासन, जांच एजेंसियां और न्यायालय इस पूरे मामले में क्या कदम उठाते हैं।
